Friday, April 10, 2026
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शहबाज-मुनीर ही नहीं अब पाकिस्तान के इन जनाब को भी चाहिए नोबेल प्राइज, जानिए कौन है ये तीसरा फर्जी पीसमेकर!!..

शहबाज-मुनीर ही नहीं अब पाकिस्तान के इन जनाब को भी चाहिए नोबेल प्राइज, जानिए कौन है ये तीसरा फर्जी पीसमेकर!!..
शहबाज-मुनीर ही नहीं अब पाकिस्तान के इन जनाब को भी चाहिए नोबेल प्राइज, जानिए कौन है ये तीसरा फर्जी पीसमेकर!!..

Pakistan Nobel Peace Prize Demand: पाकिस्तान में अब सिर्फ शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ही नहीं, बल्कि एक तीसरे चेहरे को भी नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने की मांग तेज हो गई है. पंजाब विधानसभा में पेश प्रस्ताव ने इस बहस को और हवा दे दी है, जिसमें इशाक डार को भी ‘ग्लोबल पीसमेकर’ के तौर पर पेश किया गया है. जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा में एक अनोखा प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की सिफारिश की गई है.

ये प्रस्ताव पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के चीफ व्हिप राणा मोहम्मद अरशद द्वारा पंजाब असेंबली में पेश किया गया. प्रस्ताव में 3 नेताओं की प्रभावी कूटनीति की सराहना करते हुए दावा किया गया कि उन्होंने अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई है. सदन में प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, इन प्रयासों ने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने में योगदान दिया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि इन नेताओं के हस्तक्षेप से संभावित बड़े संघर्ष को टालने में मदद मिली.

‘पीसमेकर’ की छवि गढ़ने की कोशिश
प्रस्ताव में पाकिस्तान को एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में पेश किया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में संतुलित और सकारात्मक भूमिका निभाई. पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से यह मांग की कि इन तीनों नेताओं के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए और उनके नाम औपचारिक रूप से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भेजे जाएं. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंच पर एक ‘पीसमेकर’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.

मिडिल ईस्ट तनाव का दिया गया हवाला
प्रस्ताव में विशेष रूप से अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच हालिया तनाव का उल्लेख किया गया है, जिसे वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बताया गया. असेंबली का दावा है कि शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और इशाक डार ने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस संकट को कम करने और युद्धविराम की दिशा में अहम भूमिका निभाई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में लाया गया है जब पाकिस्तान आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे में सत्ताधारी दल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश कर रहा है. अगर यह नामांकन औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो इसे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है.

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे को लेकर क्या प्रतिक्रिया होगी, यह आने वाले समय में साफ होगा. फिलहाल यह प्रस्ताव एक सिफारिश के रूप में है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अंतिम चयन प्रक्रिया नॉर्वे की समिति द्वारा की जाती है, जिसमें कई चरण शामिल होते हैं. इस प्रस्ताव ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान के इन तीन नेताओं का नाम वास्तव में वैश्विक मंच तक पहुंच पाता है।

me.sumitji@gmail.com

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