महंगे कच्चे तेल की वजह से सरकारी खजाने पर बढ़ रहे दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने विनिवेश की रफ्तार तेज कर दी है. सरकार आने वाले महीनों में देश की कई बड़ी सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है. इस सूची में LIC, हिंदुस्तान जिंक और कई सरकारी बैंक शामिल हैं. सरकार का मकसद हिस्सेदारी बिक्री के जरिए अतिरिक्त राजस्व जुटाकर वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है.

सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल आठ सरकारी कंपनियों की पहचान की गई है, जिनमें हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. अनुमान है कि सिर्फ LIC में हिस्सेदारी बेचने से सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. वहीं, हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बिक्री से करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटने की उम्मीद है.
निवेशकों की रुचि पर सरकार की नजर
हिस्सेदारी बिक्री को सफल बनाने के लिए सरकार लगातार निवेश बैंकों के साथ बैठकें कर रही है. अधिकारियों और निवेश बैंकरों के बीच हर सप्ताह चर्चा हो रही है, जिसमें निवेशकों की मांग, शेयरों की कीमत और बिक्री का सही समय तय किया जा रहा है. इसके अलावा, भविष्य में अन्य सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी के लिए नए निवेश बैंकर भी नियुक्त किए जा रहे हैं.
IDBI बैंक की बिक्री पर फिर होगी कोशिश
सरकार IDBI बैंक में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की योजना पर भी दोबारा काम कर रही है. पिछली बार खरीदारों की कमजोर रुचि के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी. अब सरकार रिजर्व प्राइस कम करने और पहले दौर में भाग लेने वाले निवेशकों से ही नए प्रस्ताव मंगाने पर विचार कर रही है. इससे इस बार सौदा पूरा होने की संभावना बढ़ सकती है.
विदेशी निवेश में कमी बनी चुनौती
सरकार की इस योजना के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. इस साल की पहली छमाही में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 29 अरब डॉलर की निकासी की है. इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा और निफ्टी50 इंडेक्स में करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज जैसे बड़े आईपीओ भी निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं.
चालू वित्त वर्ष में बड़ी उम्मीद
हालांकि, हाल के महीनों में कोल इंडिया और एनएचपीसी की हिस्सेदारी बिक्री को निवेशकों से अच्छा समर्थन मिला है. इससे सरकार का भरोसा बढ़ा है कि आगे भी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर अच्छी रकम जुटाई जा सकती है. अप्रैल से जून 2026 के बीच सरकार लगभग 2 अरब डॉलर जुटा चुकी है. वित्त वर्ष 202627 में सरकार का लक्ष्य विनिवेश के जरिए 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का है. सरकार को उम्मीद है कि इससे महंगे तेल के कारण बजट पर पड़ रहे दबाव को कम करने और राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी.



