गुजरात में कम वर्षा के कारण चार जिलों में सूखे की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया. राज्य के 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए. ये जिले हैंद्वारका, पोरबंदर, जामनगर, कच्छ. सीएम ने किसानों और पशुपालकों के लिए राहत की घोषणा की है. गुजरात में कम बारिश के कारण किसानों और पशुपालकों की समस्याएं बढ़ गई हैं. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर को सूखाग्रस्त घोषित किया और किसानों के लिए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल क्षति के लिए मुआवजा, प्रति पशु 80 रुपये की दैनिक सहायता और 150 दिनों का रोजगार शामिल है.

में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कम वर्षा से प्रभावित चार जिलों के लिए राहत उपायों की घोषणा की, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. इस निर्णय से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों और पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार सूखे की स्थिति में कृषि और पशुधन की सहायता के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं करेगी.
दो हेक्टेयर तक के किसानों को सहायता
कम वर्षा के कारण फसल के नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा दिया जाएगा. सरकार की घोषणा के अनुसार, प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता राशि अधिकतम दो हेक्टेयर तक प्रदान की जाएगी. यह सहायता कम वर्षा के कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव के बीच किसानों को आर्थिक राहत प्रदान कर सकती है. सहायता के लिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विवरण सरकारी अधिसूचना के अनुसार स्पष्ट किए जाएंगे.
पशुपालकों के लिए रियायती दरों पर चारा उपलब्ध
सूखे के समय पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने रियायती दरों पर चारे के वितरण की व्यवस्था की है. मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा 2 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा चुका है. सरकार के पास वर्तमान में तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है. आवश्यकता बढ़ने पर अतिरिक्त चारा उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है.
पशु शिविरों में प्रति पशु ₹80 की दैनिक सहायता राशि
पशुपालकों को पशुओं की देखभाल में आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए पशु शिविरों में प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. सरकार ने कहा है कि इस व्यवस्था के बाद भी यदि आवश्यकता बनी रहती है, तो पशुपालकों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कम वर्षा के कारण चारे और पानी की कमी की स्थिति में पशुओं को बचाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं.
सूखा प्रभावित गांवों में 150 दिनों का रोजगार
सूखा प्रभावित जिलों के गांवों में वीबीजी रामजी योजना के तहत 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार के अनुसार, चूंकि सूखा छह महीने तक लागू रहेगा, इसलिए इस अवधि के दौरान किसानों और पशुपालकों को आवश्यक राहत और सहायता प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाएंगे. इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को चारा, पशु शिविर और रोजगार व्यवस्था के माध्यम से सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जाएंगे.



