दिखने में चूहे जैसा, लेकिन चलता हिरण की तरह है. जरासी आहट मिलते ही झाड़ियों में छिप जाता है. आकार में छोटा होने के बावजूद यह वन्यजीवों की दुनिया में खास पहचान रखता है. इसे माउस डियर या मूषक हिरण कहा जाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पहली नजर में इसे देखकर कोई भी धोखा खा सकता है, लेकिन यह चूहा नहीं, बल्कि हिरण की एक प्रजाति है. खास बात यह है कि यह दुर्लभ जीव आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जंगलों में भी पाया जाता है

मूषक हिरण को देखने पर सबसे पहले चूहे का ध्यान आता है, लेकिन इसका चूहों से कोई संबंध नहीं है. यह ट्रैगुलिडे परिवार का स्तनधारी जीव है. भारत में पाई जाने वाली इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम ‘मोस्चियोला इंडिका’ है. यह देश में पाए जाने वाले सबसे छोटे हिरणों में से एक है. इसकी ऊंचाई करीब 25 से 30 सेंटीमीटर और वजन 3 से 4 किलो तक होता है.

सींग नहीं, नर के मुंह में दिखते हैं नुकीले दांत

सामान्य हिरणों की तरह मूषक हिरण के सींग नहीं होते. हालांकि, नर हिरण के ऊपरी जबड़े में बाहर की ओर निकले हुए नुकीले दांत दिखाई देते हैं. इसका शरीर भूरे रंग का होता है. शरीर के किनारों पर सफेद धब्बे और धारियां भी होती हैं. यही बनावट इसे जंगल की झाड़ियों और सूखे पत्तों के बीच छिपने में मदद करती है.

दिन में छिपता है, रात में निकलता है

मूषक हिरण बेहद सतर्क रहने वाला जीव है. यह दिन के समय पेड़ों के खोखले हिस्सों, चट्टानों की दरारों और घनी झाड़ियों में छिपा रहता है. रात में भोजन की तलाश में बाहर निकलता है. थोड़ीसी आहट मिलने पर भी तेजी से भागकर छिप जाता है. यही वजह है कि जंगलों में इसकी मौजूदगी के बावजूद इसे देख पाना काफी मुश्किल होता है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जंगलों में भी मौजूद

मूषक हिरण आंध्र प्रदेश के तिरुमलाशेषाचलम जंगलों में पाया जाता है. साल 2019 में यहां लगाए गए कैमरा ट्रैप में इसकी तस्वीर कैद हुई थी. नल्लमाला और श्रीशैलम के जंगलों में भी इसकी मौजूदगी के रिकॉर्ड मिले हैं.

तेलंगाना के अमराबाद टाइगर रिजर्व में इसके संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाया गया है. हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क में पाले गए मूषक हिरणों को चरणबद्ध तरीके से अमराबाद के जंगलों में छोड़ा गया.फरवरी 2026 में मुलुगु जिले के एटुरुनगरम अभयारण्य के लिंगाला वन क्षेत्र में लगे कैमरा ट्रैप में भी एक मूषक हिरण दिखाई दिया.

शिकार करने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

आकार में छोटा होने के बावजूद मूषक हिरण को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत विशेष सुरक्षा मिली है. इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची1 में शामिल किया गया है. इसका शिकार करना या इसे मारना गंभीर अपराध है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की सूची में यह फिलहाल ‘लीस्ट कंसर्न’ श्रेणी में है. जंगलों का कम होना और अवैध शिकार इसके लिए खतरा बने हुए हैं.

मूषक हिरण भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन जंगलों की जैव विविधता में इसकी अहम भूमिका है. इसकी मौजूदगी प्राकृतिक संपदा और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी का संकेत है. इसलिए इस छोटे और दुर्लभ जीव का संरक्षण भी बेहद जरूरी है.