
वित्तीय संकट से जूझ रहे बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक को बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बैंक के लिए रिवाइवल प्लान तैयार कर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेज दिया है। जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत सरकार ने बैंक को 20 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की है। सहायक पंजीयक (एआरसीएस) की अदालत से 100 से अधिक डिफॉल्टरों के गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं, जबकि आने वाले दिनों में यह संख्या 250 से अधिक पहुंच सकती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बैंक प्रबंधन और सहकारिता विभाग का कहना है कि ऋण वसूली अभियान तेज कर दिया गया है। अब तक करीब 20 डिफॉल्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इनसे लगभग 45 लाख रुपए की रिकवरी हुई है। इसके अलावा ओच्छघाट के पास स्थित एक डिफॉल्टर की जब्त की गई जमीन को 12.50 लाख रुपए में बेच दिया गया है। इस बिक्री को मिलाकर बैंक अब तक करीब 57 लाख रुपए की वसूली कर चुका है। वर्तमान में बैंक की नेटवर्थ माइनस 26 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है,। उधर, एआरसीएस सोलन गिरीश नड्डा ने बताया कि डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। और गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाएंगे तथा बैंक की राशि की वसूली के लिए संपत्तियों की नीलामी सहित सभी कानूनी उपाय अपनाए जाएंगे।
आरबीआई की कार्रवाई के बाद सक्रिय हुई थी सरकार
जून माह में आरबीआई ने सहकारिता विभाग को पत्र लिखकर बैंक का लाइसेंस रद्द कर उसे लिक्विडेट करने का सुझाव दिया था और 31 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार सक्रिय हुई और बैंक बंद होने से बचाने के लिए विस्तृत पुनर्जीवन योजना तैयार की। सहकारिता विभाग के अनुसार बैंक को दोबारा मजबूत स्थिति में लाने के लिए 20 से 25 करोड़ रुपए की आवश्यकता थी और सरकार 15 से 20 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने को तैयार है, जबकि शेष राशि शेयरधारकों और खाताधारकों के सहयोग से जुटाने की योजना है। इस बीच प्रदेश सरकार ने बैंक को 20 करोड़ की राशि प्रदान कर दी है।
