Himachal Se: Malmas / Adhikmas 2026 Start Date: आज यानी 17 मई से मलमास शुरू हो रहा है। मलमास को अधिकमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में मलमास के दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। अधिकमास में विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है। लेकिन पूजापाठ और दानपुण्य के लिए मलमास का महीना अत्यंत ही फलदायी और उत्तम माना जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। तो आइए जानते हैं कि इस बार मलमास कितने दिनों का होगा, यह कब समाप्त होगा और इस दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मलमास में क्यों बंद हो जाते हैं मांगलिक कार्य?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करते तो उस समय को मलमास कहा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, हर मास के लिए एक देवता हैं। मगर मलमास का स्वामी बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुए। स्वामी विहीन होने के कारण इस मास को मलिन मान लिया गया था लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ दिया। दरअसल पुरूषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। यही वजह है कि इस महीने में सांसारिक मांगलिक कार्य तो वर्जित होते हैं लेकिन श्रीहरि विष्णु और भगवान शिव की साधना करने से अनंत गुना फल मिलता है।
मलमास 2026 कब समाप्त होगा?
मलमास की शुरुआत 17 मई से हो चुकी है, जो कि पूरे एक महीन तक रहेगा। मलमास 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इस साल मलमास ज्येष्ठ माह में लग रहा है इसलिए इसे ज्येष्ठ मलमास या ज्येष्ठ अधिकमास कहेंगे। आपको बता दें कि मलमास या अधिकमास हर 3 साल में एक बार आता है। इससे पिछला अधिकमास साल 2023 सावन महीने में लगा था।
मलमास में क्या करें और क्या न करें?
- नया घर नहीं खरीदना चाहिए।
- गृह प्रवेश, सगाई, विवाह, नामकरण संस्कार और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य भूलकर भी न करें।
- इस दौरान नए बिजनेस या नए काम की शुरुआत करने से भी बचना चाहिए।
- इस पूरे महीने में भगवान विष्णु के ‘पुरुषोत्तम’ रूप की पूजा करें।
- इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- अधिकमास में रामायण या गीता का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
- इस महीने में किए गए दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।



