
महोबा : वह पति नहीं, साक्षात हैवान था… जिसने ममता और मातृत्व को चंद मिनटों में लहूलुहान कर दिया। बुंदेलखंड के महोबा जिले की एक अदालत ने तिहरे हत्याकांड (Triple Murder) के एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) अपर्णा त्रिपाठी-द्वितीय की अदालत ने अपनी ही पत्नी और दो मासूम सगी बेटियों की सिलबट्टे से सिर कूंचकर बेरहमी से हत्या करने वाले दोषी देवेंद्र विश्वकर्मा को मृत्युदंड (फांसी की सजा) का फरमान सुनाया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अदालत ने इस जघन्य कृत्य को क्रूरता की सारी हदें पार करने वाला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) मामला माना है।
12 साल पहले बड़े अरमानों से की थी शादी, फिर जगा अंदर का दानव
इस खूनी वारदात की पटकथा महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र में लिखी गई थी। जनपद के हमीरपुर अंतर्गत ग्राम नौरंगा निवासी हरिप्रसाद पांचाल ने पुलिस को दी गई मुख्य तहरीर में बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी रामकुमारी का विवाह करीब 12 वर्ष पहले महोबा के रहने वाले देवेंद्र विश्वकर्मा के साथ बड़े धूमधाम से किया था।
शादी के शुरुआती सालों में दामाद देवेंद्र का व्यवहार बेटी के साथ बेहद सामान्य और अच्छा था। दोनों की गृहस्थी में दो सुंदर बेटियों ने जन्म लिया। देवेंद्र घूम-घूमकर कपड़ों की फेरी लगाने (बेचने) का काम करता था। लेकिन वारदात से करीब एक साल पहले से उसके सिर पर सनक सवार होने लगी और वह आए दिन पत्नी रामकुमारी को प्रताड़ित करने लगा।
मात्र ‘खाने के विवाद’ में सुहागरात की सेज से लेकर बच्चों के बिस्तरों को किया लाल
यह रूह कंपा देने वाली वारदात 17 जुलाई 2023 की रात करीब 8:00 बजे हुई थी। दोषी देवेंद्र के पिता ठाकुरदीन के बयानों के मुताबिक, उस रात घर में सिर्फ इतनी सी बात पर तकरार शुरू हुई थी कि खाने में क्या बना है और खाना मिलने में देरी क्यों हुई। बात इतनी बढ़ी कि देवेंद्र ने गुस्से में आकर रसोई में रखा भारी-भरकम पत्थर का सिलबट्टा (मसाला पीसने वाला पत्थर) उठा लिया।
मासूमों पर भी नहीं आई दया: देवेंद्र ने सबसे पहले अपनी पत्नी रामकुमारी के सिर पर सिलबट्टे से ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे वह फर्श पर गिर पड़ी। इसके बाद उस हैवान का दिल अपनी नौ साल की मासूम बेटी आयुषि और छह साल की छोटी बेटी सोनाक्षी को देखकर भी नहीं पसीजा। उसने सोते और चीखते हुए दोनों बच्चों के सिर को भी उसी भारी सिलबट्टे से बेरहमी से कूंचकर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। तिहरे कत्ल को अंजाम देने के बाद वह घर से फरार हो गया था।
अभियोजन की अचूक पैरवी: वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर 3 साल में आया फैसला
वारदात के बाद महोबा कोतवाली पुलिस ने हरिप्रसाद की तहरीर पर हत्या का संगीन मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी देवेंद्र को गिरफ्तार किया और फॉरेंसिक व वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाकर कड़क चार्जशीट (आरोप पत्र) माननीय न्यायालय में दाखिल की।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली लंबी और गहन बहस के दौरान सरकारी वकील (अभियोजन पक्ष) ने दलील दी कि जिस पिता पर बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसने ही बेहद ठंडे दिमाग से पूरी क्रूरता के साथ तीन जिंदगियों को खत्म कर दिया। बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर देवेंद्र को दोषी करार देते हुए फांसी (Death Sentence) की सजा मुकर्रर की। कोर्ट रूम से फैसला आते ही पुलिस ने भारी सुरक्षा घेरे में दोषी को दबोचा और जेल वैन से सीधे सेंट्रल जेल लेकर रवाना हो गई।



