भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 फीसदी कर दिया. यह लगभग चार वर्षों में पहली बार दरों में बढ़ोतरी है. वास्तव में बढ़ती महंगाई और कमजोर होते रुपये के कारण पॉलिसी मेकर्स को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी. 42 के विभाजित वोट के साथ, RBI की छह सदस्यीय मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर लिया है, जिससे संकेत मिलता है कि भविष्य में दरों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है.

इस फैसले की घोषणा करते हुए, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ग्लोबल इकोनॉमी के सामने मौजूद चार प्रमुख चुनौतियों का जिक्र किया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मुंबई में RBI मुख्यालय से एक टेलीविजन बयान में मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और AI शेयरों के वैल्यूएशन बड़े सुधार का रिस्क ग्लोबल इकोनॉमिक माहौल को तनावपूर्ण बनाए हुए है, जिससे इमर्जिंग इकोनॉमीज के प्रति जोखिम से बचने का रुझान देखा जा रहा है.
पश्चिम एशिया में संघर्ष
मल्होत्रा ने कहा कि अगस्त 2026 में पिछली MPC बैठक के बाद से, पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर से बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतारचढ़ाव ने ग्लोबल इकोनॉमी को अस्थिरता की स्थिति में बनाए रखा है. उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद, ग्लोबल ग्रोथ दर मजबूत बनी हुई है.
मल्होत्रा ने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती कॉस्ट और फूड प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतों से ग्लोबल महंगाई बढ़ने की उम्मीद है, जिसके कारण प्रमुख केंद्रीय बैंकों को मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती करनी पड़ रही है.
उन्होंने कहा कि हालांकि ये फैक्टर घरेलू ग्रोथ और महंगाई के दृष्टिकोण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं, लेकिन भारतीय इकोनॉमी की अंदरूनी मजबूती और लचीलापन इन चुनौतीपूर्ण समय से निपटने में मदद कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि हम ऐसी पॉलिसीज लागू करेंगे जो इस लचीलेपन को और बढ़ाएंगी. इसके अनुसार, हम कीमतों और वित्तीय स्थिरता के लिए प्रयास करेंगे. लंबे समय में सतत विकास के लिए ये दोनों ही आवश्यक हैं.
टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं
दुनिया भर में “लंबे समय से चली आ रही व्यापारिक अनिश्चितता” की ओर इशारा करते हुए, गवर्नर ने कहा कि टैरिफ से जुड़े जोखिम और दूसरी बड़ी आर्थिक चुनौतियां ग्लोबल मार्केट के मूड को तनावपूर्ण बनाए हुए हैं.
हाल ही में अमेरिका का एक नया कानून आया है जो भारतीय सामानों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ करता है. नई दिल्ली लगातार मास्को से तेल खरीद रहा है. यह संभावित भारी टैक्स नई दिल्ली की उन कोशिशों के खिलाफ है, जिनके तहत वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में वियतनाम और चीन जैसी दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर टैरिफ शर्तें हासिल करना चाहती है.
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
मल्होत्रा ने एक और बात की ओर इशारा किया, वह थी ‘बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी’. उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट के मूड को “घबराहट भरा और कमजोर” बनाए हुए है. हाल के हफ्तों में दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, जिसकी वजह सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद और सरकारी वित्त को लेकर चिंताएं हैं.
सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में 10साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गई थी, जो 2002 के बाद से इसका सबसे ऊंचा स्तर था, जबकि जर्मनी, फ्रांस, यूके और जापान में भी यील्ड कई दशकों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.
ICICI बैंक रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में ग्लोबल फिस्कल डेफिसिट GDP का लगभग 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो महामारी से पहले के स्तर से लगभग 170 बेसिस प्वाइंट्स ज्यादा है, जबकि 2030 तक ग्लोबल पब्लिक डेट के ग्लोबल GDP से ज्यादा होने की उम्मीद है.
AI शेयरों में उतारचढ़ाव
चिंता की एक नई वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का तेजी से बढ़ना है. मल्होत्रा ने कहा कि AI शेयरों की वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट का जोखिम, दूसरे ग्लोबल जोखिमों के साथ मिलकर अनिश्चितता बढ़ा रहा है और आर्थिक माहौल को सुस्त बनाए हुए है.
पिछले महीने, दुनिया भर में AI से जुड़े शेयरों में भारी गिरावट आई. ऐसा तब हुआ जब सबसे बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के लीडर्स ने इस टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े खतरों के बारे में चेतावनी दी. इससे उस इंडस्ट्री पर भरोसा डगमगा गया, जिसके भारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ने दुनिया भर के शेयर बाज़ारों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाया था.
इस बिकवाली का असर पूरी इंडस्ट्री पर पड़ा, जहां कंपनियां अपने बड़े AI खर्च प्लान को फंड करने के लिए तेजी से कर्ज और सर्कुलर फाइनेंसिंग पर निर्भर हो रही हैं, जबकि ग्लोबल स्तर पर उधार लेने की लागत लगातार बढ़ रही है.
एन्थ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने शनिवार को X पर एक लंबा लेख शेयर किया. इसमें उन्होंने AI कंपनियों से कहा कि वे मॉडल की क्षमताओं को बढ़ाने की रफ़्तार धीमी करें, क्योंकि AI के गलत इस्तेमाल का डर बढ़ रहा है. xAI चलाने वाले एलन मस्क और OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, दोनों ने कहा कि वे अमोदेई की बात से सहमत हैं. ऑल्टमैन ने यह भी कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कंपनी इस साल IPO नहीं लाएगी.



