
लखनऊ अग्निकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए युद्धस्तर पर राहत कार्य के निर्देश दिए हैं। इस भीषण आग में दो सगी बहनों (2 साल और 2 महीने की मासूम) की जिंदा जलने से मौत हो गई, जिनके परिजनों को शासन की ओर से 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है।
UP News: लखनऊ में रिंग रोड किनारे झुग्गी बस्ती में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड में दो सगी बहनों की मौत हो गई। दमकल, पुलिस, एसडीआरएफ के जवानों द्वारा ड्रैगन लाइट और टेली टेक्टर के सहारे रात 12 से गुरुवार सुबह आठ बजे तक चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान तड़के करीब चार बजे दोनों बहनों के शरीर के लोथड़े तख्त पर चिपके मिले। गुरुवार को दोनों बच्चों के परिजनों को शासन की तरफ 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विधायक ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर सहायता राशि का चेक सौंपा। साथ ही पीड़ितों को सरकार की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
अग्निकांड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पीड़ितों को राहत पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को ही इस घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पीड़ितों के लिए नजदीकी कम्युनिटी सेंटर में रहने और खाने की व्यवस्था की गई। वहीं घटना स्थल पर भी नगर निगम और रेरा की टीम खाने के पैकेट का वितरण कर रही है। इसी क्रम में मेडिकल समेत अन्य सभी सुविधाएं अग्निकांड पीड़ितों को मुहैया कराई जा रही हैं।
त्वरित व संयुक्त कार्रवाई से बची कई जान
बुधवार शाम विकास नगर सेक्टर 12 रिंग रोड के पास झुग्गी-झोपड़ियों में आग लग गई थी। दमकल विभाग समेत पुलिस ने बड़ी जनहानि होने से रोकी। आस-पास के 30 से ज्यादा घरों को खाली करा कर लोगों की जान बचाई गई। आग लगने के बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए फौरन दमकल विभाग, स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिसकर्मियों, नगर निगम कर्मियों, नागरिक सुरक्षा सदस्यों की 400 से ज्यादा लोगों की टीम मौके पर पहुंच गई थी। इससे काफी संख्या में लोगों की जान बच पाई।
बुधवार की शाम लगी आग देर रात करीब 12 बजे बुझी थी। इसके बाद संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध अर्पणा कुमार पहुंचीं। एसडीआरएफ कमांडेंट अमित कुमार के निर्देशन में उनकी टीम, डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने पुलिस की टीम और सीएफओ अंकुश मित्तल ने दमकल की टीम को तलाशी अभियान में लगाया। बस्ती में अंधेरा था। दमकल की गाड़ियों की लाइट जलाई गई। रेस्क्यू टीम में लगे जवानों ने हाथों में ड्रैगन लाइट और टेली टेक्टर साधा। टीमों ने एक-एक सामान हटाकर तलाशी ली तो तख्त पर दो बच्चों के शव पड़े मिले। संबंधित झोपड़ी में रहने वालों को आवाज देकर बुलाया।
बच्चियों के पिता सतीश और मां पूनम उर्फ राजेश्वरी पहुंचीं। एसीपी गाजीपुर अनिद्य विक्रम सिंह के मुताबिक सतीश ने बताया कि शव उनकी बेटी स्वाति उर्फ रितु (दो वर्ष) और आयुषी (दो माह) के हैं। यहीं उनकी झोपड़ी थी जो पूरी तरह से जल गई। तख्त उन्हीं का है। फिलहाल अग्निकांड में दो बहनों की ही मौत की पुष्टि हुई है।
घटना के वक्त घर से बाहर थे पति-पत्नी
सतीश ने बताया कि वह मूल रूप से बाराबंकी जनपद के राम सनेही घाट काशीपुरवा के रहने वाले हैं। यहां करीब 20 साल से झोपड़ी बना कर रह रहे थे। बुधवार को वह काम पर गए थे। पत्नी मोहल्ले में एक दुकान पर कुछ सामान लेने गई थीं। दोनों बच्चियां तख्त पर सोई थीं। शाम को बस्ती में जब आग लगी तो वह झोपड़ी से दूर थीं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पहुंचते-पहुंचते आग की लपटें विकराल हो उठीं और उनकी झोपड़ी भी जलने लगी। पत्नी ने झोपड़ी तक पहुंचने की कोशिश की तो लोगों ने उन्हें रोक लिया। पुलिस और दमकल की टीम पहुंची। उन्होंने सुरक्षा का हवाला देकर सभी को बस्ती के बाहर कर दिया। अंतत: बच्चियां निकल नहीं पाईं और जल गईं।