स्विट्जरलैंड का नाम आते ही घड़ियां, बैंक और बर्फ से ढके लकदक पहाड़ याद आते हैं. लेकिन इस छोटे यूरोपीय देश की एक और बड़ी पहचान है. यह दुनिया के प्रमुख सोना निर्यातकों में शामिल है. ऐसा तब है जब इस देश के पास खदानें नहीं हैं. भारत भी बड़ी मात्रा में सोना स्विट्जरलैंड से खरीदता है. पहली नजर में यह बात चौंका किसी को चौंका सकती है. लेकिन सच यही है. आइए, समझते हैं कि स्विट्जरलैंड बिना सोने की खदानों के कैसे करता है यह सब? भारत समेत दुनिया के अनेक देशों को कैसे निर्यात करता है सोना? कहां से लाता है सोना?

स्विट्जरलैंड के पास बड़ी सोने की खदानें न होना उसके सोना कारोबार में बाधा नहीं है. उसने खुद को सोने की रिफाइनिंग और वैश्विक व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित किया है. वह कई देशों से खनन या पुनर्चक्रित सोना प्राप्त करता है. फिर उसे शुद्ध करके भारत समेत दुनिया के अलगअलग बाजारों तक पहुंचाता है. यही वजह है कि भारत स्विट्जरलैंड से बड़ी मात्रा में सोना खरीद सकता है, भले ही वहां सोने का बड़ा घरेलू खनन न हो.
इस कारोबार से स्विट्जरलैंड को रिफाइनिंग, वित्त, परिवहन और व्यापार सेवाओं में लाभ मिलता है. लेकिन देश की समृद्धि का आधार सिर्फ सोना नहीं, बल्कि उसकी व्यापक और विविध अर्थव्यवस्था है.
खदान से बाजार तक सोने का सफर
सोने का कारोबार केवल खदान से निकली धातु को बेचने तक सीमित नहीं है. खदान से निकला सोना अक्सर कच्चे रूप में होता है. उसमें दूसरी धातुएं और अशुद्धियां मिली हो सकती हैं. इसे शुद्ध करना, तय मानकों के अनुसार ढालना और फिर बाजार तक पहुंचाना अलगअलग काम हैं. स्विट्जरलैंड ने इसी काम में अपनी विशेषज्ञता बनाई है. वहां की रिफाइनरियां दुनिया के अलगअलग हिस्सों से आए सोने को साफ करती हैं. फिर उसे बाजार में इस्तेमाल लायक बार, सिक्कों या अन्य रूपों में ढाला जाता है. इस प्रक्रिया के बाद सोने की शुद्धता और वजन का भरोसा बढ़ता है.
स्विट्जरलैंड गोल्ड रिफाइनिंग का बड़ा सेंटर है. फोटो: Pexels
इसलिए स्विट्जरलैंड से भारत आने वाले सोने का मतलब यह नहीं कि सारा सोना स्विस खदानों से निकला है. उसका बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आता है. स्विट्जरलैंड उसे रिफाइन या व्यापारिक रूप से व्यवस्थित करके आगे भेजता है.
स्विट्जरलैंड सोना कहां से लाता है?
स्विट्जरलैंड का सोना कई स्रोतों से आता है. इसमें खदानों से निकला नया सोना और पहले से इस्तेमाल हुए आभूषणों, सिक्कों या अन्य वस्तुओं से निकाला गया पुनर्चक्रित सोना शामिल होता है. खनन वाले देशों से सोना खरीदकर उसे रिफाइन करना भी इस व्यापार का अहम हिस्सा है. खनन वाले देशों में दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पेरू और अफ्रीका के अन्य देश तथा दक्षिण अमेरिका के देश शामिल हैं. वहां से निकला सोना व्यापारियों और रिफाइनरियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचता है. हर खेप का स्रोत एक जैसा नहीं होता. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि स्विट्जरलैंड का सारा सोना किसी एक देश से आता है.
सोने की आपूर्ति में पुनर्चक्रण बेहद महत्वपूर्ण है. पुराने गहनों और सोने की अन्य वस्तुओं को पिघलाकर शुद्ध किया जा सकता है. इससे पहले से मौजूद सोना दोबारा बाजार में आता है. इस तरह सोने की आपूर्ति केवल नई खदानों पर निर्भर नहीं रहती.
भारत स्विट्जरलैंड से सोना क्यों खरीदता है?
भारत में सोने की मांग बहुत बड़ी है. लोग इसे गहनों, शादीब्याह, त्योहारों और बचत के रूप में खरीदते हैं. देश में घरेलू खनन से मिलने वाला सोना इस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसलिए भारत को विदेशों से सोना मंगाना पड़ता है. स्विट्जरलैंड से सोना खरीदने की एक वजह वहां की रिफाइनिंग क्षमता है. बड़े पैमाने पर शुद्ध सोना तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संभालने का अनुभव भी उसे अहम बनाता है. इसके अलावा, स्थापित वित्तीय और परिवहन नेटवर्क के कारण सोने को अलगअलग बाजारों तक पहुंचाना आसान होता है.
भारत के आयात में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी समय के साथ बदलती रहती है. यह कीमत, मांग, व्यापार समझौतों, करों और वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर करती है. वित्त वर्ष 202122 में भारत के कुल सोना आयात का करीब 45.8 प्रतिशत स्विट्जरलैंड से आया था. ये आंकड़े सालदरसाल कम या ज्यादा होते रहते हैं. इसके पीछे कई अलगअलग वजहें हैं.
स्विट्जरलैंड में रिफाइन किए गया सोना और सोने के उत्पाद कई देशों के बाजारों तक पहुंचते हैं. फोटो: Pexels
भारत को सोना भेजने वाले दूसरे देश
भारत केवल स्विट्जरलैंड से सोना नहीं खरीदता. संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, गिनी, पेरू और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी भारत को सोना भेजते हैं. अलगअलग वर्षों में इन देशों की हिस्सेदारी बदल सकती है. सोना जिस देश से भारत भेजा जाता है, जरूरी नहीं कि वह वहीं की खदान से निकला हो. कोई देश सोने का उत्पादक हो सकता है. कोई दूसरा उसे रिफाइन करके आगे भेज सकता है. और कोई व्यापारिक केंद्र के रूप में उसे आयात करके दोबारा निर्यात कर सकता है. इसलिए आयात के आंकड़े आम तौर पर यह बताते हैं कि सोना किस देश से भारत तक पहुंचा. वे हमेशा उसके मूल खननस्थल की पूरी कहानी नहीं बताते.
स्विट्जरलैंड कितने देशों को सोना निर्यात करता है?
स्विट्जरलैंड का सोना कारोबार वैश्विक है. उसके रिफाइन किए गए सोने और सोने के उत्पाद कई देशों के बाजारों तक पहुंचते हैं. देशों की संख्या हर साल बदली हुई हो सकती है. संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि किस साल को देखा जा रहा है, सोने के किस प्रकार को गिना जा रहा है और व्यापार के आंकड़ों में किन देशों को अलग बाजार माना गया है. हां, स्विट्जरलैंड को दुनिया के कई बाजारों से जुड़ा एक प्रमुख रिफाइनिंग और निर्यात केंद्र माना जाए. भारत उन बाजारों में से एक है. मोटे तौर स्विट्जरलैंड से सोना आयात करने वाले प्रमुख देशों में भारत के अलावा चीन, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.
भारत में घरेलू खनन से मिलने वाला सोना मांग को पूरा नहीं कर पाता, इसलिए इसे आयात किया जाता है. फोटो: Pexels
कितना सोना निर्यात करता है स्विट्जरलैंड?
स्विट्जरलैंड हर साल लगभग 1,000 से 1,500 टन सोना दूसरे देशों को भेजता है. यह एक मोटा अनुमान है. सालदरसाल मात्रा बदलती है. स्विट्जरलैंड से निर्यात होने वाले सोने में दूसरे देशों से आया, वहां रिफाइन किया गया सोना भी शामिल होता है. इसलिए यह आंकड़ा स्विस खदानों से निकले सोने की मात्रा नहीं है. भारत स्विट्जरलैंड से सबसे अधिक सोना खरीदने वाले देशों में है. हाल के वर्षों में भारत के कुल सोना आयात का लगभग 40 प्रतिशत स्विट्जरलैंड से आया है.
सोना स्विट्जरलैंड की तरक्की में कितना अहम है?
सोने का व्यापार स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. इससे रिफाइनिंग, लॉजिस्टिक्स, परीक्षण, बीमा, वित्तीय सेवाओं और व्यापार से जुड़े रोजगार तथा कारोबार को सहारा मिलता है. सोने की बड़ी खेपों को संभालने के लिए सुरक्षित भंडारण और अंतरराष्ट्रीय भुगतान की व्यवस्था भी चाहिए. इन सेवाओं का विकास स्विट्जरलैंड की आर्थिक ताकत में योगदान देता है. हालांकि, स्विट्जरलैंड की तरक्की का पूरा श्रेय सोने को देना सही नहीं होगा. देश की अर्थव्यवस्था कई क्षेत्रों पर आधारित है. सोना उनमें से एक खास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हुआ कारोबार है. इसकी अहमियत इस बात में भी है कि स्विट्जरलैंड केवल धातु को आगे नहीं भेजता. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वह उसे शुद्ध करने, प्रमाणित करने और भरोसेमंद तरीके से व्यापार करने की सेवाएं भी देता है.



