
नई दिल्ली। देशभर में सड़क इस्तेमाल करने वाले लोग एक अप्रैल से टोल चार्ज नकद नहीं दे पाएंगे, क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) पूरी तरह से डिजिटल पेमेंट सिस्टम अपनाने जा रहा है। हाईवे यात्रा को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम के तौर पर एनएचएआइ देशभर के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पर पूर्ण रोक लगा देगा। एक अप्रैल से यात्रियों को टोल चार्ज सिर्फ फास्टैग या यूपीआइ जैसे डिजिटल तरीकों से ही देना होगा।
क्यूआर को स्कैन कर यूपीआइ से पेमेंट करने का विकल्प होगा
इस कदम का मकसद नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर टोल कलेक्शन को अधिक कुशल बनाना और ज्यादा पारदर्शिता लाना है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम से गाड़ियां टोल प्लाजा से अधिक तेजी से निकल पाएंगी, जिससे यात्रा का समय बचेगा। वाहन ज्यादा तेजी से निकल पाएंगे जिससे लंबी लाइनें नहीं लगेंगी। वाहन चालकों के पास क्यूआर को स्कैन कर यूपीआइ से पेमेंट करने का विकल्प होगा।
छत्तीसगढ़ में नेशनल हाईवे पर सफर करना अब और महंगा
छत्तीसगढ़ में नेशनल हाईवे पर सफर करना अब और महंगा होने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोल की नई दरें जारी कर दी हैं। प्रदेश के सभी प्रमुख टोल प्लाजा पर एक अप्रैल से वाहनों को पांच रुपये से लेकर 20 रुपये तक अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार भिलाई, आरंग, बिलासपुर से रायपुर, कोरबा, अंबिकापुर और रायगढ़, जगदलपुर जाने वाले मार्गों पर स्थित कुम्हारी, भोजपुरी, मुढ़ीपार, पाराघाट, बगदेवा समेत अन्य टोल प्लाजा के दरों में वृद्धि की गई है।
सालाना पास अब 3,075 रुपये में
टोल की दरों के साथ-साथ एनुअल (वार्षिक) पासधारकों को भी झटका लगा है। कार के लिए बनने वाले सालाना पास की कीमत में 75 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वर्तमान में 3,000 रुपये में बनने वाला यह पास अब एक अप्रैल से 3,075 रुपये में बनेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि स्थानीय निवासियों के लिए 20 किलोमीटर के दायरे वाली छूट योजना और पुराने दर पर सफर की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी।



