Instacart Embezzlement: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के थाना मझोला पुलिस ने ईकॉमर्स कंपनी में बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी और गबन के सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश किया है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नोएडा स्थित ईकॉमर्स कंपनी इंस्टाकार्ट के मझोला इलाके के स्थित फैसिलिटेशन हब में कार्यरत कर्मचारियों ने फर्जीवाड़े का खेल रचा था. कंपनी के अधिकारी रामभवन सिंह की तहरीर पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर गहन जांच शुरू की गई थी.

जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल दो मुख्य आरोपियों, मुकेश और गौरव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. आरोपियों के पास से पुलिस ने 32 कट्टों में छिपाकर रखे गए 994 से अधिक महंगे डिलीवरी आइटम्स बरामद किए हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि ये आरोपी पिछले काफी समय से इस पूरे नेटवर्क को चला रहे थे. आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया है.
तीसरा मुख्य सरगना फिलहाल फरार
पुलिस को उनके खिलाफ मजबूत फॉरेंसिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी मिले हैं. गिरोह का तीसरा मुख्य सरगना, जिसे सहआरोपी ‘विश मास्टर’ कहकर बुलाते थे, जिसका नाम प्रमोद है, वह फिलहाल फरार है. पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और उम्मीद है कि जल्द ही उसे भी हिरासत में ले लिया जाएगा है.
एसपी सिटी के द्वारा करवाई गई मामले की जांच
मामले का ब्योरा देते हुए पुलिस अधीक्षक नगर कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि ईकॉमर्स कंपनी इंस्टाकार्ट के मझोला हब में सामान की डिलीवरी और रिटर्न का प्रबंधन देखने वाले कर्मचारी ही इस करोड़ों के गबन में शामिल पाए गए हैं. शिकायतकर्ता रामभवन सिंह ने मझोला पुलिस को दी गई अर्जी में कहा कि हब के तीन कर्मचारी प्रमोद, मुकेश और गौरव मिलकर लंबे समय से कंपनी को वित्तीय चूना लगा रहे थे. आरोपियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के डिलीवरी मैकेनिज्म में सेंध लगाकर कुल 1 करोड़ 31 लाख रुपये के सामान का गबन कर डाला था. पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के तुरंत बाद जाल बिछाकर दो आरोपियों को धर दबोचा और उनके पास से भारी मात्रा में चोरी का सामान बरामद करने में सफलता हासिल की.
किस तरीके से वारदात को देते थे अंजाम?
धोखाधड़ी के तरीके का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आने वाले ऑर्डर्स के कैंसिल होने का फायदा उठाते थे. नियम के मुताबिक, जब भी कोई ग्राहक ऑर्डर रद्द करता था, तो डिलीवरी हब से उस सामान को मूल विक्रेता के पास वापस भेजा जाना अनिवार्य होता था, लेकिन ये आरोपी कैंसिल हुए सामान को सेलर को वापस न भेजकर बीच में ही गायब कर देते थे और उसे खुले बाजार में अवैध रूप से खुद बेच देते थे. इस तरह फर्जी एंट्री और हेरफेर के जरिए उन्होंने 1.31 करोड़ का माल खुर्दबुर्द कर दिया है, फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश और बैंक खातों की जांच में जुटी है.



