कांग्रेस ने एक बार फिर चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने भारत निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक दलों को पिछले 8 सालों तक खोजने योग्य मतदाता सूची न देकर वोट चोरी में मदद करने का आरोप लगाया. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और साथ ही ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ को तुरंत रोकने की भी मांग की.

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘पिछले दो सालों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार, मजबूती से और पुरजोर तरीके से यह मांग करती आ रही है कि भारत निर्वाचन आयोग सभी राजनीतिक दलों को मतदाता सूची ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराए, जिसमें मतदाताओं के नाम और अन्य जानकारी आसानी से सर्च की जा सके. लेकिन ECI ने बारबार इस मांग को ठुकराया’.
‘वोट चोरी करने के लिए ठुकराई मांग’
उन्होंने कहा ‘असल, 2018 में जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाताओं का पता लगाया था, तभी से ECI ने इस तरह के डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराना बंद कर दिया था. वोट चोरी को अंजाम देने के लिए इस मांग को आठ साल तक ठुकराया गया’.
पिछले दो वर्षों से लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार, मजबूती से और पुरजोर तरीके से यह मांग करते आ रहे हैं कि भारत निर्वाचन आयोग सभी राजनीतिक दलों को मतदाता सूची ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराए, जिसमें मतदाताओं के नाम और अन्य जानकारी आसानी से सर्च की जा सके। लेकिन ECI ने बारबार इस मांग को ठुकराया। दरअसल, 2018 में जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाताओं का पता लगाया था, तभी से ECI ने इस तरह के डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराना बंद कर दिया था। वोट चोरी को अंजाम देने के लिए इस मांग को आठ साल तक ठुकराया गया।
15 अक्टूबर 2026 को ECI ने एक आदेश जारी किया कि Special Summary Revision के लिए राजनीतिक दलों को मतदाता सूची ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मतदाताओं की जानकारी आसानी से सर्च की जा सके। दो साल के अंतराल के बाद 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि आज पूरा देश वोट चोरों के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।
हर बार जब वोट चोरी पकड़ी जाती है, मोदी सरकार कोई नया हथकंडा अपना लेती हैकभी मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची देना बंद करना, कभी फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ना, तो कभी SIR। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने वाला।
CEC ज्ञानेश कुमार को अब कोई नहीं बचा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए ECI पर जनता के भरोसे और विश्वास को पूरी तरह खत्म कर दिया है। उन्हें हर हाल में पद छोड़ना होगा। लेकिन सिर्फ इतना काफी नहीं होगा। ECI और उसके IT सिस्टम में पूरी तरह बदलाव करना होगा। SIR की प्रक्रिया को भी तत्काल रोकना होगा, जिसने 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के वोट देने के संवैधानिक अधिकार को खतरे में डाल दिया है।
— Jairam Ramesh October 18, 2026
‘पूरा देश वोट चोरों के खिलाफ सड़कों पर उतर आया’
चुनाव आयोग के आदेश का हवाला देते हुए रमेश ने लिखा ’15 अक्टूबर 2026 को ECI ने एक आदेश जारी किया कि Special Summary Revision के लिए राजनीतिक दलों को मतदाता सूची ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मतदाताओं की जानकारी आसानी से सर्च की जा सके. दो साल के अंतराल के बाद 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि आज पूरा देश वोट चोरों के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है’.
ECI ने SSR करने के निर्देश जारी किए
इससे पहले, भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त संशोधन करने के निर्देश जारी किए थे, जिसके लिए 1 जनवरी, 2027 को पात्रता तिथि निर्धारित की गई थी.
‘हर बार सरकार ने नएनए हथकंडे अपनाए’
रमेश ने आगे आरोप लगाया कि जब भी वोट चोरी का पर्दाफाश हुआ, मोदी सरकार ने नएनए हथकंडे अपनाए. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हर बार जब वोट चोरी पकड़ी जाती है, मोदी सरकार कोई नया हथकंडा अपना लेती है. कभी मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची देना बंद करना, कभी फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ना, तो कभी SIR. लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने वाला.
‘CEC ज्ञानेश कुमार को अब कोई नहीं बचा सकता’
कांग्रेस नेता ने कहा ‘CEC ज्ञानेश कुमार को अब कोई नहीं बचा सकता. उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए ECI पर जनता के भरोसे और विश्वास को पूरी तरह खत्म कर दिया है. उन्हें हर हाल में पद छोड़ना होगा. लेकिन सिर्फ इतना काफी नहीं होगा. ECI और उसके IT सिस्टम में पूरी तरह बदलाव करना होगा. SIR की प्रक्रिया को भी तत्काल रोकना होगा, जिसने 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के वोट देने के संवैधानिक अधिकार को खतरे में डाल दिया है’.



