शेयर बाजार में कम समय में बड़ा पैसा कमाने का सपना कई छोटे निवेशकों पर भारी पड़ रहा है. खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में तेजी से मुनाफे की उम्मीद में उतरने वाले रिटेल ट्रेडर्स को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. SEBI की नई स्टडी के मुताबिक, वित्त वर्ष 202526 में शेयर बाजार के F&O में पैसा गंवाने वालों में छोटे निवेशकों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी करीब 70% रही है. दूसरी तरफ, प्रोफेशनल और बड़े बाजार खिलाड़ियों ने भारी मुनाफा कमाया. प्रोपराइटरी ट्रेडिंग डेस्क ने करीब ₹44,000 करोड़ का ग्रॉस ट्रेडिंग प्रॉफिट कमाया.

SEBI के आंकड़ों के अनुसार, FY26 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स को कुल मिलाकर करीब ₹91,685 करोड़ का नुकसान हुआ.। खास बात यह है कि F&O में ट्रेड करने वाले करीब 87.7% यानी लगभग 9 में से 10 निवेशकों को नुकसान हुआ है. औसतन हर नुकसान उठाने वाले ट्रेडर को करीब ₹1.17 लाख का घाटा हुआ.

छोटे पोर्टफोलियो वालों को सबसे ज्यादा नुकसान

SEBI की रिपोर्ट बताती है कि करीब 35% इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी होल्डिंग नहीं थी. वहीं करीब 78% ट्रेडर्स के पास ₹1 लाख से कम का इक्विटी पोर्टफोलियो था. इन छोटे निवेशकों ने बाजार के कुल टर्नओवर में करीब आधा योगदान दिया, लेकिन कुल नुकसान में उनकी हिस्सेदारी करीब 70% रही. यानी जिन निवेशकों के पास पूंजी कम थी, उनके लिए F&O ट्रेडिंग ज्यादा नुकसान वाली साबित हुई.

इसके मुकाबले प्रोपराइटरी ट्रेडर्स ने करीब ₹44,000 करोड़ का ग्रॉस ट्रेडिंग प्रॉफिट कमाया. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब ₹14,000 करोड़, कॉरपोरेट्स ने ₹8,000 करोड़ और म्यूचुअल फंड्स ने करीब ₹3,000 करोड़ का मुनाफा कमाया.

बड़े खिलाड़ियों के पास बेहतर सिस्टम

इस अंतर की एक बड़ी वजह ट्रेडिंग का तरीका भी है. बड़े संस्थागत और प्रोफेशनल ट्रेडर्स के पास तेज कंप्यूटर सिस्टम, बेहतर रिस्क मैनेजमेंट, ज्यादा पूंजी और एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग जैसी सुविधाएं होती हैं. SEBI के मुताबिक, FPI और प्रोपराइटरी ट्रेडर्स के मुनाफे का करीब 99% हिस्सा एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग करने वाली संस्थाओं से आया. यानी ये खिलाड़ी बाजार में होने वाले छोटेछोटे बदलावों पर भी बहुत तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं.
इसके उलट छोटे निवेशक अक्सर खुद मोबाइल या कंप्यूटर से ट्रेड करते हैं और कम पूंजी के साथ जल्दी मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं. खास बात ये है कि रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बड़ा नुकसान ऑप्शंस ट्रेडिंग से आया. FY26 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स के कुल नुकसान का करीब 92% हिस्सा ऑप्शंस से था.

ज्यादा पूंजी वालों में नुकसान की दर कम

SEBI की स्टडी में एक और दिलचस्प बात सामने आई. जिन ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी होल्डिंग नहीं थी, उनमें नुकसान उठाने वालों की दर करीब 93% थी. वहीं ₹10 करोड़ से ज्यादा का इक्विटी पोर्टफोलियो रखने वाले ट्रेडर्स में यह दर करीब 58% रही. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर बड़ा निवेशक मुनाफा कमाता है और हर छोटा निवेशक नुकसान करता है. लेकिन आंकड़े साफ बताते हैं कि F&O में मुनाफे का बड़ा हिस्सा प्रोफेशनल और बड़े खिलाड़ियों के पास गया, जबकि नुकसान का बड़ा बोझ छोटे खिलाड़ियों पर पड़ा.

ट्रेडर्स की संख्या घटी, लेकिन नुकसान का खतरा बना रहा

FY26 में रिटेल ट्रेडिंग में कुछ कमी भी आई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या करीब 20% घटकर 78.6 लाख रह गई, जो FY25 में 98.1 लाख थी. नए ट्रेडर्स की संख्या में करीब 40% की गिरावट आई. इसके बावजूद नुकसान की दर काफी ज्यादा रही. FY26 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स का कुल नुकसान FY25 के करीब ₹1.12 लाख करोड़ से घटकर ₹91,685 करोड़ रहा, लेकिन औसत नुकसान अभी भी काफी बड़ा था. SEBI ने यह भी पाया कि अनुभव बढ़ने के बावजूद कई ट्रेडर्स लगातार नुकसान से नहीं बच पाए. लगातार दो साल नुकसान उठाने के बाद भी ट्रेडिंग जारी रखने वाले करीब 90% ट्रेडर्स को अगले साल भी नुकसान हुआ.

कुल मिलाकर, SEBI की स्टडी F&O बाजार में छोटे निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत देती है. कम पूंजी, जल्द मुनाफे की उम्मीद और एक्सपायरी के आसपास लगातार ऑप्शन ट्रेडिंग का कॉम्बिनेशन काफी जोखिम भरा हो सकता है.दूसरी ओर, प्रोफेशनल खिलाड़ियों के पास बेहतर तकनीक, सिस्टम और रिस्क मैनेजमेंट होने से उन्हें बाजार में बढ़त मिलती है.