बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में अगर आप अभी से उनकी पढ़ाई और भविष्य के लिए सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं, तो भारतीय जीवन बीमा निगम की चाइल्ड प्लान्स एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं. ये योजनाएं न सिर्फ लाइफ कवर देती हैं, बल्कि बचत, बोनस और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 80C में टैक्स छूट का लाभ भी उपलब्ध कराती हैं. हालांकि, किसी भी योजना को चुनने से पहले उसका संभावित रिटर्न समझना जरूरी है. इसके लिए इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न एक अहम पैमाना माना जाता है.

2026 में LIC की तीन प्रमुख चाइल्ड योजनाएं—Jeevan Lakshya , New Children’s Money Back और Jeevan Tarun —काफी चर्चा में हैं. आइए जानते हैं कि इनमें क्या अंतर है और किस योजना में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

क्या होता है IRR और क्यों है जरूरी?

IRR यानी Internal Rate of Return वह अनुमानित सालाना रिटर्न है, जो निवेशक द्वारा जमा किए गए प्रीमियम और पॉलिसी से मिलने वाले कुल लाभों के आधार पर निकाला जाता है. इसमें सर्वाइवल बेनिफिट, मैच्योरिटी राशि और बोनस शामिल होते हैं. किसी भी निवेश योजना में IRR जितना अधिक होता है, लंबे समय में उसका संभावित रिटर्न उतना ही बेहतर माना जाता है.

तीनों योजनाओं की तुलना

अगर नवजात बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का सम एश्योर्ड लिया जाए, तो तीनों योजनाओं में सालाना प्रीमियम करीब 42 हजार रुपये के आसपास आता है. इनमें Jeevan Lakshya का IRR लगभग 7.02 फीसदी है, जो तीनों में सबसे अधिक है. इस योजना में 25 वर्ष की अवधि पूरी होने पर पूरा सम एश्योर्ड और बोनस मिलता है. इसके अलावा निर्धारित अवधि के दौरान सर्वाइवल बेनिफिट भी मिलता है.

वहीं New Children’s Money Back योजना का IRR करीब 6.87 फीसदी है. इसमें बच्चे के 18, 20 और 22 वर्ष की उम्र पर सम एश्योर्ड का 2020 फीसदी हिस्सा मिलता है और मैच्योरिटी पर शेष राशि के साथ बोनस दिया जाता है.

दूसरी ओर Jeevan Tarun योजना का IRR करीब 6.86 फीसदी है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 20 से 24 वर्ष की उम्र के बीच जरूरत के अनुसार 20 से 40 फीसदी तक सर्वाइवल बेनिफिट चुनने की सुविधा मिलती है. 25 वर्ष की उम्र पर पूरा सम एश्योर्ड और बोनस भी मिलता है.

सभी योजनाओं में मिलते हैं ये फायदे

इन तीनों योजनाओं में बच्चे के जन्म से लेकर 12 वर्ष तक की उम्र में निवेश किया जा सकता है. सभी योजनाओं में लाइफ कवर, बोनस, लोन और सरेंडर वैल्यू जैसी सुविधाएं मिलती हैं. इसके अलावा, यदि प्रीमियम भरने वाले मातापिता की मृत्यु हो जाती है, तो प्रीमियम वेवर राइडर के तहत आगे का प्रीमियम माफ हो सकता है और बच्चे को तय समय पर सभी लाभ मिलते रहते हैं.

निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी चाइल्ड प्लान का चुनाव केवल रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए. बच्चे की मौजूदा उम्र, शिक्षा का लक्ष्य, परिवार का बजट और आपकी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए. साथ ही पॉलिसी के नियम और शर्तों को अच्छी तरह पढ़ें और जरूरत पड़ने पर LIC एजेंट या प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें. सही योजना का चुनाव आज करने से भविष्य में बच्चे की उच्च शिक्षा का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है.