Patna High Court judgment:पटना हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि किसी महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह दबाना अपने आप में रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. हालांकि, यह लज्जा भंग करने का अपराध जरूर है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी की रेप के प्रयास की सजा रद्द कर दी. साथ ही आरोपी की सजा पहले से जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दी गई और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.

घटना 8 फरवरी 2010 की रात करीब 10 बजे बेगूसराय की है. एक विधवा महिला अपने बच्चे के साथ छप्पर वाले घर में सो रही थी. आरोप था कि उसी गांव का एक अधेड़ व्यक्ति गलत नीयत से उसके घर में जबरन घुस गया. उसने घर में जल रहा दीया बुझा दिया और महिला के ऊपर लेट गया. महिला ने शोर मचाया तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया. आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई की.
महिला ने पहले गांव में पंचायत के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी पंचायत में नहीं पहुंचा. इसके बाद महिला थाने गई, जहां उसकी शिकायत दर्ज नहीं हुई. फिर 10 फरवरी 2010 को उसने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में शिकायत की. अदालत के निर्देश पर पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच के बाद रेप की कोशिश के आरोप में चार्जशीट दाखिल की.
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप की कोशिश और घर में अनधिकृत रूप से घुसने के मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल और छह महीने की सश्रम कैद सुनाई थी. आरोपी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी.
हाईकोर्ट ने रेप की कोशिश की धारा क्यों हटाई?
8 अक्टूबर 2026 को जस्टिस संदीप कुमार की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रेप की कोशिश साबित करने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं है. कोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने महिला के घर में घुसकर दीया बुझाया, उसके ऊपर लेटा और मुंह दबाया. ये हरकतें महिला की मर्यादा भंग करने वाली थीं. हालांकि, ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था कि आरोपी ने अपने या महिला के कपड़े उतारे या रेप करने के लिए संबंध बनाने की दिशा में कोई कदम उठाया.
कोर्ट ने किन बातों को माना अहम?
महिला और पड़ोसी की गवाही से आरोपी का घटनास्थल पर होना साबित हुआ. आरोपी ने भी इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया. घटना के दो दिन के भीतर शिकायत की गई थी. कोर्ट ने माना कि सामाजिक बदनामी और डर के कारण यौन अपराधों में शिकायत दर्ज कराने में देरी हो सकती है.
हाईकोर्ट ने रेप की कोशिश के आरोप में दी गई सजा रद्द कर दी, लेकिन IPC की धारा 354 के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। घर में अनधिकृत रूप से घुसने के अपराध में भी आरोपी दोषी रहा. दोनों अपराधों में उसकी सजा पहले से जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दी गई. साथ ही, महिला को मुआवजा देने के लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.



