अगर आप अगले कुछ दिनों में सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा इंतजार करना बेहतर हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों में उतारचढ़ाव बना रह सकता है. इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़े हैं.

निवेशकों की नजर अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों, शुरुआती पीएमआई के आंकड़ों के अलावा यूरोप और चीन के केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर रहेगी. इन घटनाक्रमों से यह संकेत मिल सकता है कि दुनिया भर में ब्याज दरों का रुख आगे कैसा रहेगा.

अमेरिकाईरान तनाव बढ़ने का असर

विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले किए हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है. ऐसे हालात का असर कच्चे तेल के साथसाथ सोनाचांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर भी देखने को मिल सकता है.

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रणव मेर का कहना है कि महीने के आखिर में होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोने में दबाव बना रह सकता है. हालांकि, निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी.

पिछले हफ्ते सोनाचांदी में आई बड़ी गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले सप्ताह करीब 2,572 रुपये यानी लगभग 2 फीसदी टूटकर 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 6,261 रुपये यानी करीब 2.8 फीसदी गिरकर 2.16 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. वैश्विक बाजार में भी यही रुख देखने को मिला. कॉमेक्स पर सोना करीब 2.3 फीसदी और चांदी 6.4 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुई.

डॉलर और ब्याज दरों का बढ़ा दबाव

एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी के अनुसार, मजबूत अमेरिकी डॉलर, महंगा कच्चा तेल और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की संभावना ने सोने पर दबाव बढ़ाया है. उनका कहना है कि कीमतों में थोड़ी तेजी आते ही निवेशकों ने नई खरीदारी के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी. रुपये में मामूली मजबूती भी सोने को सहारा नहीं दे सकी, क्योंकि डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है.

अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी नजर?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, यूरोप और ब्रिटेन के पीएमआई आंकड़े, चीन से जुड़े आर्थिक संकेतक और पश्चिम एशिया की भूराजनीतिक स्थिति सोनाचांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे. अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने में फिर तेजी लौट सकती है. वहीं, यदि आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं और डॉलर मजबूत बना रहता है तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है.