Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार सुबह एक बार फिर तेजी देखने को मिली है. एशियाई बाजार के शुरुआती कारोबार में तेल के दाम तब चढ़ गए, जब ये खबर सामने आई कि अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर हमला किया है. दोनों देशों के बीच पिछले आठ महीने से चल रही जंग में इस ताजा कार्रवाई ने तनाव बढ़ा दिया है. बाजार को डर है कि इस हमले से मिडिल ईस्ट से होने वाली तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित हो सकती है.

मंगलवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 12:30 तक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.57 फीसदी चढ़कर 106.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 1.66 फीसदी की बढ़त के साथ 98.06 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट आई थी. सोमवार को ये 8.66 डॉलर टूटकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था.

केश्म द्वीप पर अमेरिका ने क्यों किया हमला

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से केश्म द्वीप पर हमले की जानकारी दी है. कुछ अधिकारियों ने इस सैन्य कार्रवाई को बचाव में उठाया गया कदम बताया है. उनका कहना है कि ये हमला ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की छूट से रोकने के लिए किया गया. केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वॉटरर ने बताया कि जब बाजार को लग रहा था कि मामला कूटनीतिक रास्ते से सुलझ जाएगा, तभी इस सैन्य कार्रवाई की खबर ने माहौल बदल दिया. इससे तेल की कीमतों में फिर से जोखिम बढ़ गया है.

होर्मुज के रास्ते सप्लाई पर बड़ा असर

अमेरिकाईरान के बीच ये संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ था. इस जंग की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही काफी कम हो गई है. जंग से पहले दुनिया भर के कुल कच्चे तेल के साथसाथ प्राकृतिक गैस की सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था. अक्टूबर के आखिर में ब्रेंट क्रूड छह महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था. बाजार को इस बात की आशंका थी कि मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद मिडिल ईस्ट का ये संघर्ष और भड़क सकता है.

शांति की कोशिशों के बीच ट्रंप पर दबाव

एक तरफ सैन्य कार्रवाई हो रही है, तो दूसरी तरफ जंग रोकने की बातचीत भी जारी है. तेहरान ने सोमवार को कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच संपर्क बना हुआ है. हाल ही में कतर के मध्यस्थों के साथ ईरान की कई दिनों तक बातचीत चली. इसमें प्रस्तावों में कुछ बदलाव तो हुए, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बताया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शांति वार्ता के लिए सरकार को कुछ अधिकार दिए हैं. वहीं, अमेरिका में महंगे पेट्रोल की वजह से मतदाताओं पर बोझ बढ़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान युद्ध को माना जा रहा है, जिसके चलते ट्रंप पर इस जंग को खत्म करने का भारी दबाव है. ट्रंप ने सोमवार को इस बात पर संदेह जताया कि क्या वो ईरान पर फिर से सैन्य हमले शुरू करने की अपनी धमकी पर अमल करेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि तेहरान के साथ समझौता हो सकता है.

अबू धाबी में रूसयूक्रेन की बैठक कराएगा अमेरिका

मिडिल ईस्ट के अलावा अमेरिका एक दूसरे मोर्चे पर भी शांति की कोशिश कर रहा है. अमेरिका 10 से 11 नवंबर को अबू धाबी में यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडलों को एक साथ लाएगा. इस बैठक में यूक्रेन के खिलाफ मॉस्को के युद्ध को खत्म करने, युद्ध के बाद के सुरक्षा समझौतों और तनाव कम करने पर चर्चा की जाएगी.