Saturday, February 7, 2026
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‘मुस्लिम देशों का एक होना जरूरीˌ वरना…’,सऊदी का साथ पाकर उछलने लगा पाक, Islamic NATO पर ख्वाजा आसिफ का बयान

‘मुस्लिम देशों का एक होना जरूरीˌ वरना…’,सऊदी का साथ पाकर उछलने लगा पाक, Islamic NATO पर ख्वाजा आसिफ का बयान

Islamic NATO: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मुस्लिम देशों से नाटो जैसे सामूहिक सुरक्षा ढांचे की अपील की, इजरायल को खतरा बताते हुए इस्लामिक नाटो पर जोर दिया।

‘मुस्लिम देशों का एक होना जरूरीˌ वरना…’,सऊदी का साथ पाकर उछलने लगा पाक, Islamic NATO पर ख्वाजा आसिफ का बयान

Khawaja Asif on Islamic NATO: पाकिस्तान ने एक बार फिर मुस्लिम देशों के बीच नाटो जैसा सैन्य गठबंधन बनाने के संकेत दिए हैं। यह विचार विशेष रूप से पाकिस्तान और सऊदी अरब के पिछले साल हुए रक्षा समझौते के बाद जोर पकड़ रहा है। इस समझौते को लेकर माना जा रहा है कि जल्द ही तुर्की और अन्य देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में कहा कि मुस्लिम बहुल देशों को मिलकर एक बड़ा सामूहिक सुरक्षा ढांचा बनाना चाहिए। उन्होंने खासतौर पर इजरायल को मुस्लिम देशों के लिए खतरे के रूप में बताते हुए इस्लामिक नाटो की आवश्यकता पर जोर दिया।

क्या बोले ख्वाजा आसिफ?

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौते का विस्तार संभव है और इसमें अन्य देशों को शामिल करने का रास्ता खुला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी नए देश की एंट्री पर निर्णय पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों को मिलकर करना होगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर दोनों देश तैयार होंगे, तो तुर्की या अन्य देश इस रक्षा समझौते का हिस्सा बन सकते हैं। उनका मानना है कि मुस्लिम देशों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक सामूहिक रक्षा ढांचे की दिशा में काम करना चाहिए। इससे देशों को एक-एक करके कमजोर या असुरक्षित होने से रोका जा सकेगा।

इससे पहले पाकिस्तान के एक अन्य मंत्री रजा हयात हिराज ने भी इस्लामिक नाटो जैसे गठबंधन की संभावना पर बयान दिया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते में तुर्की के शामिल होने की संभावना लगभग तय हो गई है। तीनों देशों ने लगभग एक साल की बातचीत के बाद डील का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

क्या है इस्लामिक नाटो?

बीते साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में नाटो जैसी व्यवस्था शामिल है, जिसके तहत एक देश पर हमला होने पर इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। अब चर्चा है कि तुर्की भी इस समझौते में शामिल हो सकता है। अगर तुर्की शामिल हो जाता है, तो तीनों देश नाटो के आर्टिकल-5 जैसी सामूहिक रक्षा क्लॉज से बंध जाएंगे।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की एक सैन्य और आर्थिक गठबंधन बनाते हैं, तो यह क्षेत्र में मजबूत ताकत के रूप में उभरेगा। इस्लामिक नाटो की संभावना ने इसलिए वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है।

me.sumitji@gmail.com

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