
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी महाजंग के बीच अब एक और बड़ी खबर आ रही है. ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी टेक कंपनी Oracle के UAE फैसिलिटी पर हमला कर दिया है.
हाल ही में Oracle सुर्खियों में बनी रही है. कंपनी ने भारत से 12 हजार लोगों को नौकरी से निकाला है और ग्लोबल 30 हजार लोगों की छंटनी का टारगेट है. बहरहाल, अब ओरैकल फिर से चर्चा में है और इस बार अटैक को लेकर.
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने दुबई में Oracle के डेटा सेंटर को निशाना बनाया. हालांकि UAE ने अब तक इस बात को कन्फर्म नहीं किया है कि ईरान ने ओरैकल के डेटा सेंटर पर अटैक किया है.
दुबई के तरफ से एक X पर पोस्ट आया है जिसमें कहा गया है कि ये ईरान ने वहां किसी भी ओरैकल के ऑफिस पर अटैक नहीं किया है. दुबई ने ईरान के इस दावे को खारिज किया है. हालांकि सोशल मीडिया पर दुबई से जुड़े कई हैंडल से ये पोस्ट किया जा रहा है कि Oracle के डेटाबेस डिसरप्ट हुए हैं.
बताया जा रहा है कि Oracle का अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के साथ पार्टनर्शिप है. इतना ही नहीं, इस कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन लैरी एलिसन के ईजाइली सरकार के साथ मजबूत संबंध हैं. इस वजह से ईरान इसे नैचुरल और वैलिड टार्गेट बताता है.
गूगल और मेटा पर ईरान अटैक करेगा तो क्या होगा?
अगर ईरान गूगल और मेटा जैसी कंपनियों पर हमला करता है तो क्या होगा? जानने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं. भारत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है.
गौरतलब है कि हाल ही में ईरान ने बहरीन में ऐमेजॉन के AWS डेटा सेंटर को निशाना बनाया था. ईरान हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल अटैक बंद नहीं करते हैं तो वो अमेरिकी टेक कंपनियों पर अटैक करेगा.अब टेक इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस जंग का हिस्सा बनता दिख रहा है.
अमेरिकी टेक कंपनियों पर संकट
Gizmodo की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि वह अमेरिकी टेक कंपनियों को वैलिड टारगेट मानता है. इसमें Oracle, Intel, Amazon, Meta, Microsoft, Apple और Google जैसी कंपनियां शामिल हैं. अब तक Oracle की सर्विसेस में किसी बड़े आउटेज या डैमेज की बात सामने नहीं आई है और ना ही कंपनी की तरफ से ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी किया गया है.
ईरान की चेतावनी के बाद अमेरिकी कंपनी इंटेल ने ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी किया है. कंपनी ने कहा है कि वो इस वॉर पर नजर बनाए हुई है और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है. कंपनी की तरफ से कहा गया है कि कर्मचारियों की सेफ्टी उनकी फर्स्ट प्रायॉरिटी है.
Amazon पर पहले ही हमला?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा डेवलपमेंट यह है कि Amazon Web Services (AWS) के डेटा सेंटर पर हमला होने की बात सामने आ चुकी है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बहरीन में Amazon के क्लाउड ऑपरेशन को नुकसान पहुंचा है और इससे सर्विसेज भी प्रभावित हुईं. इतना ही नहीं, इससे पहले UAE और बहरीन में AWS के कई डेटा सेंटर ड्रोन हमलों में प्रभावित हुए थे, जिससे बैंकिंग, पेमेंट और कई डिजिटल सर्विसेज पर असर पड़ा.
18 अमेरिकी कंपनियां निशाने पर
ईरान ने हाल ही में 18 अमेरिकी कंपनियों को सीधे चेतावनी दी है. इसमें Apple, Microsoft, Google, Amazon, IBM, Intel जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. IRGC ने इन्हें आतंकी संस्थाएं तक बता दिया और कहा कि इनके ऑफिस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया जा सकता है. यह भी कहा गया है कि इन कंपनियों के कर्मचारियों को अपने ऑफिस छोड़ देने चाहिए क्योंकि ये जगहें अब संभावित टारगेट हैं.
टेक कंपनियां क्यों बन रही हैं टारगेट?
ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिका और इजरायल की सैन्य और इंटेलिजेंस गतिविधियों में मदद कर रही हैं. खासतौर पर क्लाउड, AI और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को डिजिटल हथियार की तरह देखा जा रहा है. यही वजह है कि अब डेटा सेंटर, जो पहले सिर्फ टेक्नोलॉजी का हिस्सा थे,जंग के मैदान में बदलते दिख रहे हैं.

