इंटरनेट के तकनीकी विकास ने आधुनिक जीवन शैली को बदल दिया है. समय के साथ इन्टरनेट का उपयोग जनसामान्य में अपनी पैठ बना कर सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीके को बदल दिया है. इंटरनेट ने न केवल हमारे काम करने के तरीके को बदला, बल्कि सोचने, समझने और समाज से जुड़ने के दृष्टिकोण में भी क्रांतिकारी बदलाव ला दिए हैं. मित्र, रिश्तेदारों से बातचीत करने, महत्वपूर्ण बिषयों पर जानकारी साझा करने, बैंकिंग लेन-देन, आनलाइन सेवाओं का लाभ, रोजगार खोजनें में, ऑनलाइन खरीददारी करने के लिए भी इन्टरनेट उपयोगी है. कहा जाता है कि तकनीक जितनी प्रसन्नता देती है उतना ही तनाव भी देती है. इस नयी तकनीक के बढ़ते प्रयोग से अब सावधान होने की आवश्यकता हो गई है. अन्यथा इसके भारी नुकसान उठाने पड़ सकते है. शक्तिशाली साइबर अपराधी नियमित रूप से इटरनेट पर हमला कर रहे है. हमारी छोटी सी चूक साइबर अपराधियो के लिए डेटा चोरी के द्वार खोल सकती है. साइबर अपराधी हमारे पैसे चुरा सकते है. हमारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते है. यह देखा गया है कि अधिकांश साइबर अपराध मानवीय लापरवाही के कारण होते हैं. इसलिए साइबर सुरक्षा जागरूकता महत्वपूर्ण है.

साइबर अपराध क्या है?
साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है, जो कम्प्यूटर और इटरनेट के माध्यम से किया जाता है. इसमे गैर कानूनी रूप से किसी की निजी जानकारी प्राप्त करना, जानकारी जुटाना, उसका गलत प्रयोग करना, उसमें फेरबदल करना, आन लाईन बैंकों से पैसे चुराना, ब्लैकमेल करना, आपत्तिजनक तस्वीरे साझा करना आदि शामिल है. साइबर अपराध हमेशा आर्थिक लाभ से ही प्रेरित नही होते अपितु साइबर अपराध मे गैर आर्थिक लाभ भी शामिल है. इसमें नौकरी से संबधित धोखाधड़ी व्यक्तिगत जानकारी, आधारकार्ड, क्रेडिट कार्ड, डेविट कार्ड बैंक खातों की सूचना को चुराकर उसका दुरुपयोग करना. सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की आपत्तिजनक तस्वीरें साझा कर उसे ब्लैकमेल करना, शारीरिक व यौन शोषण भी हो सकता है.

साइबर अपराध की श्रेणी में पहचान की चोरी से आशय यह है कि किसी की व्यक्तिगत जानकारी उसकी अनुमति के बिना गलत तरीके से प्राप्त करना है. व्यक्तिगत जानकारी में उसका नाम, फोन नम्बर, बैंक खाता संख्या, आधारकार्ड आदि हो सकते है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पहचान की चोरी के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं धोखा देने वाला व्यक्ति चुराई गई व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग बैंकों के खाते तक पहुंचने, सोशल मीडिया पर आपकी पहचान का दुरुपयोग करने के लिए कर सकता है.

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साइबर अपराधी या हमलावर पीड़ित का सोशल मीडिया अकांउट हैक कर प्रोफाइल पर आपत्तिजनक सामग्री भेज देते हैं और ब्लैकमेल करते हैं. साइबर अपराधी ई-मेल, काल व एसएमएस के माध्यम से पीड़ित को लाटरी जीतने की बधाई देता है और उत्साह में व्यक्ति खुश होकर लाटरी की धनराशि पाने के लिए उत्सुक हो जाता है. अपराधी लाटरी की राशि प्राप्त करने के लिए टोकनमनी की मांग करता है. OTP एव अन्य सूचनाएं साझा करने के लिए कहता है. व्यक्ति जैसे ही महत्त्वपूर्ण जानकारी अपराधी से साझा करता है उसके खाते से धनराशि चुरा ली जाती है. सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी का चलन तेजी से बढ़ा है.

दोस्ती कर मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक शोषण की घटनाएं तेजी से बढ़ी है. दोस्ती करके साइबर अपराधी लगातार भरोसेमन्द बनकर महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त कर लेता है और बाद में उसका दुरुपयोग कर उसे परेशान कर शारीरिक और भावनात्मक रुप से शोषण करते हैं.

सभी उपयोगकर्ता उसमे महत्वपूर्ण जानकारी, व्यावसायिक दस्तावेज, व्यक्तिगत फाइल, फोटो, वीडियो आदि डिजिटल डिवाइस में संरक्षित करते है. इसलिए इन सभी दस्तावेजों की सुरक्षा आवश्यक है. फेसबुक, इस्टाग्राम् एवं रील्स पर भी फेक आइडी के जरिए भी साइबर फ्राड किया जा रहा है. सभी मोबाइल उपयोगकर्ता साइबर अपराधियों के रडार पर होते ही हैं. साइबर अटैकर्स अवसर मिलते ही उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं. जन सामान्य ही नहीं बड़ी-बड़ी नामी कंपनियां भी साइबर अटैकर्स की जद में आ जाती हैं.

2026 के प्रमुख साइबर खतरे का सांख्यिकीय विश्लेषण
वर्तमान डेटा के अनुसार, साइबर अपराध अब केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह “डेटा-ओनली एक्सटॉर्शन” (बिना एन्क्रिप्शन के डेटा चोरी कर फिरौती मांगना) की ओर बढ़ गया है. वैश्विक लागत के तहत 2026 के अंत तक यह ग्राफ साइबर अपराध की कुल वार्षिक लागत लगभग $10.5 ट्रिलियन से