
चित्रदुर्ग के 35 वर्षीय रेणुकास्वामी हत्याकांड मामले में बेंगलुरु की 59वीं सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट से एक बहुत बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले में सहआरोपी प्रदोष की सरकारी गवाह बनने की याचिका को सेशंस कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस फैसले को मुख्य आरोपी व मशहूर कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा और उनकी दोस्त पवित्रा गौड़ा के लिए एक गंभीर झटके के रूप में देखा जा रहा है। प्रदोष के सरकारी गवाह बनने के बाद अब अभियोजन पक्ष को रेणुकास्वामी की हत्या के पीछे की पूरी साजिश, हत्या से पहले की घटनाओं और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की वास्तविक भूमिका की प्रत्यक्ष जानकारी मिल सकेगी।
हालांकि, सरकारी गवाह बनने के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। ANI के मुताबिक, अगर वह शर्तें पूरी नहीं करता है तो उसे मिली छूट खत्म हो सकती है और उसे फिर से आरोपी माना जा सकता है। इससे सरकारी पक्ष को रेणुकास्वामी की हत्या से पहले हुई घटनाओं और इसमें उसकी भूमिका के बारे में और जानकारी मिल सकेगी।
रेणुकास्वामी मर्डर केस क्या है?
यह 35 साल के रेणुकास्वामी की हत्या का मामला है। जून 2024 में बेंगलुरु में रेणुकास्वामी का शव मिला था। इस हत्या के सिलसिले में दर्शन, पवित्रा गौड़ा और कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकारी पक्ष के मुताबिक, रेणुकास्वामी की हत्या कथित तौर पर पवित्रा गौड़ा से जुड़े एक विवाद के बाद की गई थी; पवित्रा गौड़ा भी इस मामले में आरोपी हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कोर्ट अभी इन आरोपों की जांच कर रही है।
प्रदोष के सरकारी गवाह बनने से उसकी गवाही कानूनी कार्यवाही का अहम हिस्सा बन सकती है। कोर्ट उसका बयान दर्ज करेगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके द्वारा दी गई जानकारी का आकलन करेगी।
दर्शन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश होते रहेंगे
यह घटनाक्रम कोर्ट द्वारा दर्शन की उस अर्ज़ी को खारिज करने के कुछ समय बाद हुआ है जिसमें उन्होंने ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने की मांग की थी। एक्टर ने कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की इजाज़त मांगी थी, खासकर गवाहों से जिरह के दौरान। उनके वकील हशमत पाशा ने तर्क दिया था कि दर्शन की व्यक्तिगत मौजूदगी से कोर्ट को कार्यवाही के दौरान उनसे ज़रूरी जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया कि दर्शन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ही शामिल होते रहें। अन्य आरोपी भी वीडियो लिंक के ज़रिए कोर्ट के सामने पेश हो रहे हैं। जज ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि दर्शन और अन्य आरोपियों को अपने वकीलों से बातचीत करने के पर्याप्त मौके मिलें, जिसमें गोपनीय बातचीत भी शामिल है। जेल अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सुनवाई के दौरान ऑडियो और वीडियो कनेक्टिविटी ठीक रखें और तकनीकी रुकावटों को कम से कम करें। सिटी सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार से इन इंतज़ामों की देखरेख करने को कहा गया है। अब यह केस आगे बढ़ेगा, जिसमें प्रदोश के ‘अप्रूवर’ बनने से अभियोजन पक्ष के मामले में एक अहम नया पहलू जुड़ गया है।
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