Ayatollah Ali Khamenei: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. 4 जुलाई से शुरू होने वाले इस हाईप्रोफाइल अंतिम संस्कार में भारत भी शामिल होगा. इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण दिया गया था.

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के अंतिम संस्कार में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा शामिल होंगे. इसके लिए वह जल्द ही तेहरान पहुंचेंगे. इस खबर की पुष्टि ईरानी सूत्रों के हवाले से की गई है.
भारत को मिला था निमंत्रण
बता दें कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की ओर से ईरानी सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पीएम मोदी को निमंत्रण भेजा गया था. हालांकि, समाचार एजेंसी एएनआई ने ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस हाई प्रोफाइल अंतिम संस्कार में भारत से बिहार के राज्यपाल और केंद्रीय राज्यमंत्री सम्मिलित होने जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री क्यों नहीं जा रहे ईरान?
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले से तय इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर रहने वाले हैं. यही कारण है कि वह ईरान नहीं जा रहे है. बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में हुआ था.
इजरायल ने सीधे अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकानों को निशाना बनाया. खामेनेई की मौत के करीब 4 महीने बाद उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है. अंतिम संस्कार का कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा.
बिहार के राज्यपाल क्यों जा रहे ईरान?
ईरान की ओर से मिले इस निमंत्रण के बाद भारत ने काफी सोचसमझकर फैसला लिया. चूंकि, बिहार के राज्यपाल हसनैन भारतीय सेना के एक काफी जिम्मेदार और सम्मानित पूर्व अधिकारी हैं.
पश्चिम एशिया की राजनीति और अन्य हालातों के बारे में उनका अनुभव काफी अच्छा है. उनका ईरान जाना कई मामलों में अहम हो जाता है. इसके साथ ही विदेश राज्य मंत्री के रूप में काम कर रहे पबित्र का चयन ईरान के साथ भारत की कूटनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
खामेनेई के निधन पर भारत ने जताया था दुख
भारत और ईरान काफी पुराने साथी और सहयोगी हैं. ऐसे में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी नई दिल्ली में स्थित ईरान के दूतावास पहुंचे थे और शोक जताया था. करीब 40 दिनों तक लगातार चले युद्ध के बीच में कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान नेतृत्व के साथ संपर्क में रहे.
इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि इससे पहले साल 2024 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राबिम रियासी की हेलीकॉप्टर हादसे में हुई मौत के बाद तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व किया था.
ईरान के कई शहरों में होगा कार्यक्रम
रिपोर्ट्स बताती है कि अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले मार्च में ही तय किया गया था हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तकरार के बाद इसको टाल दिया गया. इसके बाद खामेनेई का अंतिम संस्कार का कार्यक्रम 04 जुलाई से शुरू होकर कई दिनों तक अलगअलग शहरों में चलने वाला है.
बताया गया कि राजकीय स्तर पर अंतिम संस्कार का कार्यक्रम 04 जुलाई से शुरू होगा. इसमें खामेनेई का पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंज मोसाल्ला कॉम्पेलेक्स में रखा जाएगा. वहीं, ईरान में कई सार्वजनिक जुलूसों की योजनाएं भी निर्धारित हैं. अंतिम दफन का काम खामेनेई के गृहनगर मशहद में किया जाएगा, जो 9 जुलाई को निर्धारित है.



