
तेहरान: ट्रंप ने जब ईरान की सभ्यता तबाह करने का ऐलान किया था तब पूरी दुनिया की सांसें थम गई थीं. हालांकि, अटैक से कुछ घंटों पहले ही ईरान और अमेरिका के बीच फिर से सीजफायर हो गया है. इस युद्धविराम के बाद जहां एक तरफ ट्रंप और जेडी वेंस इसे अमेरिका की ‘ऐतिहासिक जीत’ बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक गलियारों में ये चर्चा तेज है कि ईरान ने शब्दों का ऐसा जाल बुना है जिसमें ट्रंप प्रशासन फंसता नजर आ रहा है. ईरान ने यूरेनियम इनरिचमेंट पर खेल कर दिया है. जो ट्रंप के लिए किसी सदमे से कम नहीं होगा.
ईरान ने US के साथ किया भाषा का खेल
ईरान ने इस युद्धविराम के लिए जो 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, उसमें सबसे बड़ा विवाद ‘यूरेनियम इनरिचमेंट’ (Uranium Enrichment) को लेकर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यहां एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है.
फारसी वर्जन: ईरानी मीडिया, यहां के लोगों और अधिकारियों के लिए जारी किए गए सीजफायर प्रस्ताव में साफ लिखा है कि अमेरिका को ईरान के ‘यूरेनियम इनरिचमेंट के अधिकार’ को मानना होगा. यानी ईरान परमाणु शक्ति बनने की राह पर चलता रहेगा.
इसे ‘लॉस इन ट्रांसलेशन’ नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई एक कूटनीतिक चाल माना जा रहा है ताकि ट्रंप को यह लगे कि उन्होंने ईरान को झुका दिया है लेकिन असल में ईरान को कोई नुकसान हुआ ही नहीं.
यूनेरियम छीनना था अमेरिका की प्रायोरिटी
परमाणु हथियारों के लिए यूरेनियम का इनरिचमेंटही इस पूरे युद्ध की असली वजह थी. बावजूद इसके, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में बड़े कॉन्फिडेंस के साथ कहा कि यूरेनियम का मुद्दा ‘परफेक्टली टेकन केयर ऑफ’ यानी पूरी तरह सुलझा लिया गया है.
ट्रंप का मानना है कि वो सैटेलाइट के जरिए ईरान के स्टॉकपाइल पर नजर रख लेंगे लेकिन जानकारों का कहना है कि जमीनी हकीकत और गुप्त ठिकानों की जानकारी केवल सैटेलाइट से नहीं मिल सकती.
वेंस ने भले ही इसे बड़ी उपलब्धि बताया है, लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि ये एक ‘नाजुक शांति समझौता’ है अगर ईरान अपनी चालों से बाज नहीं आया तो बमबारी फिर शुरू हो सकती है.
ईरान की दूसरी बड़ी मांगें
ईरान सिर्फ परमाणु मुद्दे पर ही नहीं खेल रहा, बल्कि उसने मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा बदलने की तैयारी कर ली है.
होर्मुज की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान चाहता है कि इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर उसका पूरा कंट्रोल रहे.
अमेरिकी सेना की विदाई: पूरे क्षेत्र से अमेरिकी कॉम्बैट फोर्स को बाहर निकालने की शर्त.
अरबों डॉलर की वापसी: विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को तुरंत रिलीज करना.
जहा ट्रंप इसे अपनी साफ-सुथरी जीत बता रहे हैं, वहीं तेहरान की गलियों में इसे अमेरिका की ‘मजबूरी’ के रूप में पेश किया जा रहा है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि ईरान ने कागजों पर ट्रंप को वह दिखाया जो वो देखना चाहते थे, जबकि हकीकत में उसने अपने परमाणु कार्यक्रम का रास्ता खुला रखा है.




