भारत में धर्म बदलने के बाद आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं, यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है. इसकी वजह धर्म परिवर्तन और पिछड़े वर्ग के आरक्षण से जुड़ा अदालत का फैसला है. मद्रास हाई कोर्ट ने जून 2026 में तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत दूसरे पिछड़े वर्गों से इस्लाम अपनाने वाले कुछ लोगों को पिछड़ा मुस्लिम वर्ग का दर्जा देने का प्रावधान था. इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी दी गई.

अदालत ने कहा कि केवल हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने के आधार पर कोई व्यक्ति अपने पुराने सामाजिक दर्जे के सहारे नए मुस्लिम पिछड़े वर्ग का दर्जा नहीं मांग सकता. लेकिन इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि धर्म बदलने के बाद हर व्यक्ति का आरक्षण खत्म हो जाता है या केवल अनुसूचित जनजाति के लोगों को ही आरक्षण मिल सकता है.
ST के लिए धर्म के आधार पर पाबंदी नहीं
भारत में अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए अलगअलग नियम हैं. SC के मामले में धर्म से जुड़ी स्पष्ट शर्त है, जबकि ST के लिए धर्म के आधार पर ऐसी सामान्य पाबंदी नहीं है. OBC में आरक्षण का लाभ संबंधित समुदाय की मान्य सूची और लागू नियमों पर निर्भर करता है.
वहीं EWS के लिए आर्थिक स्थिति और दूसरी पात्रता शर्तें देखी जाती हैं. इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण मिलेगा या नहीं, इसका जवाब व्यक्ति की श्रेणी और लागू कानून को समझकर ही दिया जा सकता है.
धर्म बदलने पर आरक्षण के नियम एक नजर में
- SC: हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के पात्र लोगों को SC दर्जा मिल सकता है.
- ST: केवल धर्म बदलने से ST का दर्जा अपने आप खत्म नहीं होता.
- OBC: संबंधित समुदाय का मान्य सूची में होना और नियम पूरे करना जरूरी है.
- EWS: आर्थिक और अन्य पात्रता शर्तें पूरी होने पर लाभ मिल सकता है.
SC आरक्षण: मुस्लिम या ईसाई बनने पर क्या होगा?
अनुसूचित जाति यानी SC आरक्षण के नियम संविधान आदेश, 1950 के पैरा 3 में दिए गए हैं. इसके अनुसार, हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म को मानने वाले व्यक्ति को SC का सदस्य नहीं माना जाता. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए SC समुदाय का कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो वह SC दर्जे के आधार पर मिलने वाले आरक्षण का दावा नहीं कर सकता. सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 में भी इस कानूनी प्रावधान को स्पष्ट किया था.
- हिंदू से मुस्लिम धर्म अपनाने पर: SC दर्जे के आधार पर आरक्षण नहीं मिलेगा.
- हिंदू से ईसाई धर्म अपनाने पर: SC दर्जे के आधार पर आरक्षण नहीं मिलेगा.
- हिंदू से सिख धर्म अपनाने पर: अन्य शर्तें पूरी होने पर SC दर्जा मिल सकता है.
- हिंदू से बौद्ध धर्म अपनाने पर: अन्य शर्तें पूरी होने पर SC दर्जा मिल सकता है.
ST आरक्षण: धर्म परिवर्तन से नहीं खत्म होता दर्जा
अनुसूचित जनजाति यानी ST के मामले में नियम SC से अलग हैं. ST की संवैधानिक सूची में शामिल जनजातियों के लिए SC जैसी धर्म आधारित सामान्य पाबंदी नहीं है. इसका मतलब है कि कोई आदिवासी व्यक्ति मुस्लिम, ईसाई या किसी दूसरे धर्म को अपनाता है, तो केवल इस वजह से उसका ST दर्जा अपने आप खत्म नहीं हो जाता.
हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं है कि धर्म बदलने वाला हर व्यक्ति ST आरक्षण का हकदार हो जाता है. व्यक्ति का संबंधित अधिसूचित जनजाति से होना और अन्य जरूरी शर्तें पूरी करना आवश्यक है. इसलिए ST आरक्षण के मामले में व्यक्ति की जनजातीय पहचान और लागू नियम महत्वपूर्ण हैं.
OBC आरक्षण: हिंदू से मुस्लिम बनने पर क्या होगा?
जून 2026 में मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत कुछ पिछड़े वर्गों और SC समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा मुस्लिम वर्ग का दर्जा देने का प्रावधान था.
अदालत ने कहा कि केवल इस्लाम अपनाने से व्यक्ति अपने पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर मुस्लिम पिछड़ा वर्ग का दर्जा नहीं मांग सकता. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी संबंधित मामले में इस रुख को बरकरार रखा.
EWS आरक्षण: सामान्य वर्ग के लोगों के लिए नियम
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए केंद्र सरकार में 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान है. यह उन लोगों के लिए है जो SC, ST और OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते और तय आर्थिक और दूसरी पात्रता शर्तें पूरी करते हैं. अगर सामान्य वर्ग का कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो केवल धर्म परिवर्तन उसके EWS आरक्षण की पात्रता तय नहीं करता. उसकी आय, संपत्ति और लागू नियमों के आधार पर फैसला होगा.



