राजस्थान के जैसलमेर में डेजर्ट नेशनल पार्क है. इस पार्क में छोड़े गए छह महीने के गोडावण का लोमड़ी ने शिकार कर लिया. इस नर गोडावण को सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पाला गया था और 14 अक्टूबर को जंगल में छोड़ा गया था. 18 अक्टूबर को वह पानी पीने के लिए कुंड पर पहुंचा, इसी बीच लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया. सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए वन विभाग के अधिकारियों को घटना का पता चला. अब भारतीय वन्यजीव संस्थान ने बाकी सात गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना फिलहाल टाल दी है.

गोडावण की निगरानी के लिए उसके शरीर पर सैटेलाइट ट्रैकिंग डिवाइस लगाई गई थी. जब वैज्ञानिकों को सैटेलाइट सिग्नल मिलना बंद हो गया, तो फील्ड स्टाफ को आशंका हुई. टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक लोमड़ी वहां से भाग चुकी थी. घटनास्थल पर गोडावण के पंख और शरीर के अन्य अवशेष मिले. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। टीम ने ट्रैकिंग डिवाइस बरामद कर ली है. वहीं, मौके से मिले खून के नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया है.

11 गोडावणों को जंगल में बसाने की थी योजना

दरअसल, जैसलमेर के सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए 11 गोडावणों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ने की योजना बनाई गई थी. चार अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दो गोडावणों को जंगल में छोड़ा था. इसके बाद 14 अक्टूबर को दो और नर गोडावणों को खुले जंगल में छोड़ा गया.

इनमें से एक छह महीने के गोडावण का शिकार हो गया. राहत की बात यह है कि जंगल में छोड़े गए बाकी तीन गोडावण सुरक्षित बताए जा रहे हैं. हालांकि, इस घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान ने शेष सात गोडावणों को जंगल में छोड़ने का कार्यक्रम फिलहाल रोक दिया है.

घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान अब गोडावणों को जंगल में छोड़ने से जुड़े प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रहा है. नए पक्षियों को जंगल में छोड़ने का फैसला समीक्षा पूरी होने के बाद लिया जाएगा. वैज्ञानिक यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे छोड़े जाने वाले गोडावणों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके.

संरक्षण अभियान जारी रहेगा

वन अधिकारी के मुताबिक, जंगल में एक जानवर का दूसरे जानवर का शिकार करना प्राकृतिक प्रक्रिया है. ऐसे इलाकों में लोमड़ियों की मौजूदगी स्वाभाविक है.

उन्होंने बताया कि फील्ड टीमें लगातार गोडावणों की निगरानी कर रही हैं. इस घटना से संरक्षण अभियान का मनोबल कमजोर नहीं होगा. मिशन को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा. गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी है और इसके संरक्षण के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में इस घटना के बाद निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा अहम मानी जा रही है.