सेकंड हैंड कार खरीदना कई बार एक अच्छा सौदा लग सकता है, लेकिन इसमें छिपे हुए जोखिम भी होते हैं. खासकर बारिश या बाढ़ से प्रभावित गाड़ियां अक्सर बाहर से ठीक लगती हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह खराब हो सकती हैं. ऐसी कारों में इंजन, वायरिंग सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रिकल पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंचता है. बाद में ये वाहन बारबार खराब होते हैं और मेंटेनेंस का खर्च बहुत बढ़ जाता है. इसलिए खरीदने से पहले सावधानी बहुत जरूरी है.

बाहरी हिस्से की जांच करें
सबसे पहले कार के बाहर और इंजन एरिया को ध्यान से देखें. इंजन बॉडी के आसपास अगर मिट्टी, जंग या पानी के पुराने निशान दिखें तो यह खतरे का संकेत हो सकता है. के अंदर धुंध या पानी के धब्बे भी बाढ़ में डूबी गाड़ी की पहचान हो सकते हैं. नई जैसी कार में ज्यादा जंग होना भी शक पैदा करता है.
अंदरूनी हिस्सों पर ध्यान दें
कार के अंदर बैठकर उसकी गंध पर ध्यान दें. अगर अंदर से नमी या फफूंद जैसी बदबू आए तो यह फ्लड डैमेज का संकेत हो सकता है. कई बार ऐसी गाड़ियों में बदबू छुपाने के लिए का इस्तेमाल किया जाता है. सीट बेल्ट, कार्पेट और सीटों के नीचे नमी या दाग जरूर जांचें.
छिपे हुए हिस्सों की जांच
डिक्की खोलकर स्पेयर व्हील के नीचे पानी के निशान या जंग देखें. दरवाजों के किनारों और सीटों के नीचे भी कीचड़ या नमी के संकेत मिल सकते हैं. अगर कार के अंदरूनी स्क्रू या बोल्ट में असामान्य जंग दिखे तो सावधान हो जाएं.
दस्तावेज और टेस्ट भी जरूरी
VIN नंबर की मदद से कार का पूरा इतिहास ऑनलाइन चेक करें. अगर संभव हो तो कार का सर्विस रिकॉर्ड और इंश्योरेंस क्लेम हिस्ट्री भी देखें. टेस्ट ड्राइव के दौरान इलेक्ट्रिकल फंक्शन जैसे पावर विंडो, लाइट्स और इंफोटेनमेंट सिस्टम जरूर चेक करें.
थोड़ी सी सावधानी और सही जांच आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है. सेकंड हैंड कार खरीदते समय जल्दबाजी न करें और हर पहलू को ध्यान से जांचें, ताकि आप सुरक्षित और सही डील कर सकें.



