Varanasi News: पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में नदियों के बढ़ते जलस्तर के रूप में साफ दिखाई दे रहा है. धर्मनगरी काशी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए करीब 64 मीटर के पास पहुंच गया है. हालांकि, जलस्तर अभी चेतावनी बिंदु और खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वाराणसी प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं.

गंगा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी के कारण वाराणसी के प्रसिद्ध 84 घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह टूट गया है. सावन के दूसरे सोमवार से ठीक पहले प्रशासन ने एहतियात के तौर पर छोटी और बड़ी सभी प्रकार की नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है.

घाटों की सीढ़ियों के पानी में डूब जाने के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर श्री काशी विश्वनाथ धाम के ‘गंगा द्वार’ को बंद कर दिया गया है और ललिता घाट से प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है.

15 फीट ऊपर शिफ्ट हुई विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती

जलस्तर बढ़ने का असर दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध दैनिक गंगा आरती पर भी पड़ा है. आरती का मूल स्थल मां गंगा के जल में लगभग 4 मीटर अंदर समा गया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि शनिवार से गंगा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसी को ध्यान में रखते हुए गंगा आरती का स्थल 15 फीट ऊपर स्थानांतरित कर दिया गया है, ताकि आरती का क्रम अटूट रहे और श्रद्धालु सुरक्षित दूरी से दर्शन कर सकें.

जिलाधिकारी ने NDRF संग किया निरीक्षण, राहत शिविर अलर्ट पर

हालात की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने एनडीआरएफ की टीम के साथ नाव से गंगा और वरुणा नदी के तटवर्ती इलाकों का निरीक्षण किया. जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं. गंगा और वरुणा नदी के जलस्तर पर 24 घंटे सतर्क निगरानी रखी जाए. संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पूर्वचिन्हित राहत शिविरों, पहुंच मार्गों और आवश्यक संसाधनों को अलर्ट मोड पर रखा जाए. तटवर्ती क्षेत्रों के निवासियों को जागरूक किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें बिना किसी विलंब के सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके.