पंजाब सरकार ने एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच सीबीआई से करवाने का फैसला किया है. सीएम भगवंत मान ने इस आशय की घोषणा की है. एक्स पर लिखी पोस्ट में सीएम मान ने कहा है कि पंजाब को नशे से मुक्ति के लिए जो भी कदम उठाने पड़ें, राज्य सरकार उठाएगी. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भरोसे के बाद CBI की टीम मानसा पहुंच गई है.

आइए, इसी बहाने जानते हैं कि राज्य सरकार किसी मामले की जांच सीबीआई को कैसे सौंपती है? देश में किसकिस के पास अधिकार है कि वह किसी मामले की जांच सीधे सीबीआई को सौंप सके? क्या है डीएसपीई एक्ट? कैसे काम करता है यह एक्ट?

किसी गंभीर या संवेदनशील मामले में अक्सर सीबीआई जांच की मांग उठते हुए देखा जाता है. लेकिन हर मामले की जांच सीबीआई तक नहीं पहुंचती. असल में इसकी एक व्यवस्था है. यह खुद से नहीं होता. इसके लिए कानून में तय प्रक्रिया और अधिकारों का पालन करना पड़ता है. जब राज्य सरकार किसी मामले की जांच सीबीआई को सौंपना चाहती है, तो वह केंद्र सरकार को औपचारिक अनुरोध भेजती है. इसमें मामले के तथ्य, जांच सीबीआई को सौंपने के कारण और संबंधित रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं.

केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करती है. सीबीआई से भी मामले की जांच संभालने के बारे में राय ली जा सकती है. स्वीकृति और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई मामले की जांच अपने हाथ में लेती है.

परविंदर सिंह झोटा.

CBI जांच को राज्य की सहमति क्यों है जरूरी?

राज्य सरकार सीबीआई को दो तरह से सहमति दे सकती है.

  • पहली, सामान्य सहमति. इसके तहत तय दायरे में सीबीआई को राज्य में जांच करने की पहले से अनुमति दी जाती है.
  • दूसरी, विशेष सहमति. इसमें राज्य किसी खास मामले में सीबीआई को जांच की अनुमति देता है.

अगर राज्य ने सामान्य सहमति वापस ले ली है, तो नए मामलों में सीबीआई को आमतौर पर राज्य की विशेष सहमति लेनी पड़ती है. सहमति वापस लेने का असर पहले से दर्ज मामलों पर अपने आप नहीं पड़ता. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी व्यवस्था दी हुई है.

राज्य की मंजूरी के बिना क्या सीबीआई जांच कर सकती है?

सामान्य तौर पर सीबीआई राज्य की सहमति के बिना उस राज्य के भीतर अपनी जांच की शक्तियां इस्तेमाल नहीं कर सकती. यह डीएसपीई एक्ट की धारा 6 से जुड़ा नियम है. इसका मकसद राज्यों और केंद्र के अधिकार क्षेत्र के बीच कानूनी सीमा बनाए रखना है. लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण अपवाद है.

साकेतिक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट या संबंधित हाईकोर्ट अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सीबीआई जांच का आदेश दे सकता है. ऐसी स्थिति में राज्य की सहमति जरूरी नहीं होती. अदालतें ऐसा आदेश आम तौर पर गंभीर परिस्थितियों में देती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। केवल यह मांग कर देना कि जांच सीबीआई को सौंप दी जाए, अपने आप में आदेश का आधार नहीं बनता. अदालत मामले के तथ्यों और न्याय की जरूरत पर विचार करती है.

किसके पास जांच का आदेश देने का अधिकार?

  • राज्य सरकार: राज्य सरकार केंद्र से अनुरोध कर सकती है और आवश्यक सहमति दे सकती है. राज्य के भीतर सीबीआई को जांच सौंपने का यह एक सामान्य रास्ता है.
  • केंद्र सरकार: डीएसपीई एक्ट की धारा 5 के तहत केंद्र सरकार डीएसपीई की शक्तियां और अधिकार क्षेत्र राज्य तक बढ़ा सकती है. लेकिन राज्य के क्षेत्र में इन शक्तियों के इस्तेमाल के लिए धारा 6 के तहत राज्य की सहमति का नियम भी लागू होता है.
  • सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट: दोनों संवैधानिक अदालतें राज्य की सहमति के बिना भी सीबीआई जांच का निर्देश दे सकती हैं. यह अधिकार न्यायिक समीक्षा और संविधान के तहत अदालतों की शक्तियों से जुड़ा है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीबीआई को सौंपी जांच

ਨਸ਼ਿਆਂ ਖਿਲਾਫ਼ ਲੜ ਰਹੇ ਪਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਝੋਟਾ ਦੇ ਪਿਤਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਹਰ ਸਮੇਂ ਡੱਟ ਕੇ ਖੜ੍ਹੇ ਹਾਂ…
ਪਰਿਵਾਰ ਦੀ ਮੰਗ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵਾਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਅਸੀਂ ਇਹ ਕੇਸ CBI ਨੂੰ ਸੌਂਪ ਰਹੇ ਹਾਂ…
ਨਸ਼ੇ ਦੇ ਸੌਦਾਗਰਾਂ ਖਿਲਾਫ਼ ਸਾਡੀ ਲੜਾਈ ਆਰਪਾਰ ਦੀ ਹੈ… ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਨਸ਼ਾਮੁਕਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਜੋ ਵੀ ਸਖ਼ਤ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣਾ ਪਿਆ, ਅਸੀਂ ਪਿੱਛੇ ਨਹੀਂ ਹਟਾਂਗੇ…

— Bhagwant Mann October 20, 2026

आम नागरिक क्या कर सकता है?

सीबीआई जांच की चाहत लिए कोई भी पीड़ित व्यक्ति राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग कर सकता है. सुनवाई न होने पर वही व्यक्ति हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है. ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता भी खुला हुआ है. शर्त यह है कि हाईकोर्ट ने आपकी याचिका खारिज कर दी हो. इस तरह स्पष्ट है कि किसी व्यक्ति की मांग से सीबीआई जांच अपने आप शुरू नहीं होती. राज्य सरकार की सहमति या अदालत का आदेश, और कानून की अन्य जरूरी शर्तें, अहम होती हैं.

DSPE एक्ट क्या है?

डीएसपीई का फुल फॉर्म दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना है. इसका गठन और अधिकार दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 यानी डीएसपीई एक्ट से जुड़े हैं. सीबीआई को जांच की कई शक्तियां इसी कानून के तहत मिलती हैं. सीबीआई स्वयं हर अपराध की जांच करने वाली असीमित अधिकार वाली एजेंसी नहीं है.

कानून के अनुसार, केंद्र सरकार अधिनियम की धारा 3 के तहत कुछ अपराधों को अधिसूचित करती है. सीबीआई उन्हीं अपराधों की जांच कर सकती है, और वह भी अपने अधिकार क्षेत्र तथा लागू प्रक्रिया के भीतर. अधिनियम की धारा 5 केंद्र सरकार को डीएसपीई की शक्तियां और अधिकार क्षेत्र किसी राज्य तक बढ़ाने का अधिकार देती है. लेकिन इस अधिकार पर धारा 6 की शर्त लागू होती है. सामान्य स्थिति में राज्य के भीतर जांच करने के लिए संबंधित राज्य सरकार की सहमति जरूरी होती है.

राज्य सरकार किसी मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करती है और संबंधित कानूनी सहमति की प्रक्रिया पूरी करती है. डीएसपीई एक्ट की धारा 5 केंद्र को अधिकार क्षेत्र बढ़ाने की शक्ति देती है. धारा 6 राज्य की सहमति को सामान्य शर्त बनाती है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट इस सहमति के बिना भी जांच का आदेश दे सकते हैं.