PACS Petrol Pump Scheme: गांवों में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक कृषि साख समितियों पैक्स के माध्यम से पेट्रोल और डीजल के खुदरा आउटलेट खोले जा रहे हैं। इस पहल के तहत अब तक 115 पैक्स ने सहमति दी है। वहीं 62 से अधिक पैक्स के पेट्रोल पंप पूरी तरह से चालू हो चुके हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ईंधन मिल सकेगा।

बता दें कि, इस जानकारी को सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने फेसबुक पेज के ऑफिशियल पेज पर दी है।

PACS Petrol Pump Scheme: क्या है PACS?

पैक्स का पूरा नाम प्राथमिक कृषि ऋण समिति है। यह ग्राम पंचायत स्तर पर काम करने वाली एक सहकारी संस्था है, जो किसानों को समय पर और कम ब्याज पर लोन , खाद, बीज और कृषि उपकरण उपलब्ध कराती है।

बता दें कि, अब पैक्स को बहुउद्देशीय केंद्र बनाकर वहां जन औषधि केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर और माइक्रो एटीएम जैसी बैंकिंग सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

PACS Petrol Pump Scheme: क्या होगा फायदा?

पैक्स के जरिए पेट्रोल पंप चलाने से ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से ईधन मिल सकेगा। वहीं पैक्स की आय में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे किसानों को समय पर डीजल और पेट्रोल मिल सकेगा।

1. लोगों और किसानों को पेट्रोलडीजल खरीदने के लिए दूर के कस्बों या शहरों में नहीं जाना पड़ता।

2. कृषि यंत्रों के लिए समय पर और सुगम रूप से ईधन मिलता है, जिससे खेती की लागत और देरी कम होती है।

3. पेट्रोल और डीजल की बिक्री से पैक्स को नियमित कमीशन और नया आय स्रोत मिल सकता है, जिससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

4. पेट्रोल पंप के संचालन और प्रबंधन के लिए स्थानीय युवाओं और कामगारों को रोजगार मिलेगा।

5. पैक्स का दायरा केवल ऋण देने तक सीमित न रहकर खाद, बीज, जन औषधि केंद्र और ईंधन आपूर्ति जैसी सेवाओं तक फैलता है।

6. 115 पैक्स की सहमति होना और 62 आउटलेट का चालू हो जाना गांव की ग्रोथ को दिखाता है।

हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।