Ranji Trophy : वैभव सूर्यवंशी का बल्ला इन दिनों भारतीय क्रिकेट में खूब चर्चा बटोर रहा है, लेकिन बिहार की रणजी ट्रॉफी टीम में उनका नाम नहीं देखकर प्रशंसक हैरान हैं। बिहार क्रिकेट संघ ने 202627 रणजी ट्रॉफी सीजन के शुरुआती दो मुकाबलों के लिए टीम घोषित कर दी है। इसमें कई खिलाड़ियों को जगह मिली, लेकिन वैभव का नाम गायब है। आखिर ऐसा क्यों हुआ, जबकि वह बिहार के सबसे चर्चित युवा क्रिकेटरों में शामिल हैं? इसकी वजह उनके टीम से बाहर होने से ज्यादा उनकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में व्यस्तता है।

टीम इंडिया के साथ होने के कारण नहीं खेलेंगे Ranji Trophy के मुकाबले
वैभव सूर्यवंशी को बिहार की रणजी टीम में जगह नहीं मिलने की सबसे बड़ी वजह उनकी राष्ट्रीय टीम के साथ व्यस्तता है। वह वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए भारतीय टीम का हिस्सा हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भी खेलना है।
इन दोनों सीरीज के कार्यक्रम के कारण वैभव शुरुआती रणजी ट्रॉफी मुकाबलों के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को खराब प्रदर्शन या चयनकर्ताओं की नाराजगी से जोड़ना सही नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है और इसी वजह से वह फिलहाल घरेलू क्रिकेट से दूर रहेंगे।
11 अक्टूबर से शुरू होगा बिहार का रणजी अभियान
बिहार क्रिकेट संघ ने रणजी ट्रॉफी 202627 के पहले दो मुकाबलों के लिए 17 सदस्यीय टीम चुनी है। टीम की कप्तानी साकिबुल गनी को सौंपी गई है, जबकि हिमांशु सिंह उपकप्तान की जिम्मेदारी संभालेंगे।
बिहार का पहला मुकाबला 11 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के खिलाफ राजगीर के नए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके बाद टीम का सामना बड़ौदा से होगा। चयन प्रक्रिया भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा नियुक्त चयनकर्ताओं की देखरेख में पूरी की गई है।
क्या अगले रणजी मुकाबलों में होगी वैभव की वापसी?
वैभव सूर्यवंशी की वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय टीम के कार्यक्रम के बाद वह बिहार के लिए कब उपलब्ध हो पाते हैं। मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उनकी व्यस्तता रहेगी। ऐसे में शुरुआती चार रणजी मुकाबलों में भी उनका खेलना मुश्किल बताया जा रहा है।
वैभव ने कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले अवसर उनके अनुभव को और मजबूत कर सकते हैं। बिहार के प्रशंसक जरूर चाहेंगे कि वह उपलब्ध होते ही घरेलू टीम के लिए भी मैदान पर उतरें।



