Venezuela Earthquake: उत्तरी वेनेजुएला से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। देश में आए दो बेहद शक्तिशाली भूकंपों ने भयंकर तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 235 लोगों की मौत हो चुकी है। वेनेजुएला के स्वास्थ्य मंत्रालय और अधिकारियों के मुताबिक, अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से घायलों की संख्या को देखते हुए मरने वालों का यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

लगभग एक दशक के बाद देश ने ऐसी भयानक प्राकृतिक आपदा का सामना किया है, जिसने राजधानी काराकस सहित उत्तरी तटवर्ती इलाकों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।

40 सेकेंड के भीतर आए दो बड़े झटके
मौसम विभाग और वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार की शाम यह त्रासदी लेकर आई। शाम करीब 6 बजकर 4 मिनट पर याराकुय राज्य की राजधानी ‘सैन फेलिप’ में पहला भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.2 मापी गई।

लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि ठीक 40 सेकेंड के बाद इसी प्रांत से महज 23 किलोमीटर दूर ‘यूमारे’ कस्बे में 7.5 तीव्रता का दूसरा और उससे भी खतरनाक झटका महसूस किया गया। यह वही इलाका है जहां वेनेजुएला की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियां मौजूद हैं। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि इनका असर पड़ोसी देश कोलंबिया तक देखा गया।

छुट्टी के दिन बरपा कुदरत का कहर
जिस दिन यह हादसा हुआ, उस दिन वेनेजुएला में सार्वजनिक अवकाश था। ऐसे में ज्यादातर लोग अपने घरों में थे या बाहर छुट्टियां मना रहे थे। अचानक आए इन झटकों के कारण दर्जनों इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।

नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने देश की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान तटीय राज्य ‘ला गुएरा’ में हुआ है, जहाँ कई मकान मलबे के ढेर में बदल चुके हैं। फिलहाल करीब 4300 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज जारी है।

दुनिया भर से मिल रही है मदद
इस मुश्किल घड़ी में वेनेजुएला की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय आगे आया है। कई देशों ने बचाव कार्यों में सहयोग का भरोसा दिया है। अमेरिका ने संकट से निपटने के लिए 150 मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

इसके साथ ही, मलबे में दबे लोगों को तलाशने और त्वरित राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अमेरिकी सेना अपने परिवहन जहाजों और लड़ाकू विमानों को खोजी दलों के साथ वेनेजुएला भेज रही है। फिलहाल जमीन पर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके।