
Patna High Court Judgment: पटना l रात के अंधेरे में महिला के घर में घुसना, दीया बुझाना, उसके ऊपर लेट जाना और चीखने से रोकने के लिए मुंह दबाना, किसी के लिए भी ये हरकतें बेहद गंभीर हो सकती हैं. लेकिन बिहार की पटना हाईकोर्ट ने एक मामले में इन घटनाओं को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है. पटना हाईकोर्ट ने इसे अटेम्प्ट-टू-रेप नही बल्कि महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना है. जिसके बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया और 25 हजार रुपयों का जुर्माना लगाया है.
क्या है पूरा मामला
पूरा मामला फरवरी साल 2010 बेगूसराय का है.वारदात 8 फरवरी की रात 10 बजे हुई थी. विधवा महिला अपने बच्चे के साथ छप्पर वाले घर में सो रही थी. तभी रात के अंधेरे में आरोपी जबरन उसके घर में घुस आया और घर में घुसते ही उसने सबसे पहले दीया बुझा दिया. आरोपी फिर महिला के ऊपर लेट गया. जब महिला मदद के लिए चिल्लाने लगी तो शुरू किया, तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया, ताकि उसकी आवाज बाहर तक न पहुंच सके.
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी चार साल की सजा
महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आरोपी को पकड़कर जमकर उसकी पिटाई कर दी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। घटना के बाद महिला संबंधित थाने में केस दर्ज कराने पहुंची. लेकिन पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं करने पर वह10 फरवरी 2010 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) कोर्ट पहुंची. जिसके बाद बलिया थाने में केस दर्ज हुआ.
आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376 के साथ धारा 511 (रेप की कोशिश) और धारा 448 (घर में अनधिकृत रूप से घुसना) के तहत केस दर्ज किये गए. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप की कोशिश के लिए चार साल और घर में घुसने के लिए छह महीने सजा सुनाई थी.
कोर्ट ने क्या कहा?
इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. जिसपर अक्टूबर 2026 को पटना हाईकोर्ट की जस्टिस संदीप कुमार की बेंच ने सुनवाई की. हाईकोर्ट ने कहा, कि महिला के घर में रात में घुसना, दीया बुझाना, उसके ऊपर लेटना, चीखने से रोकने के लिए मुंह को दबाना छेड़छाड़ है, ये दुष्कर्म का प्रयास नहीं है. किसी व्यक्ति को रेप की कोशिश का दोषी ठहराने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं है. इसके लिए ऐसे ठोस सबूत होने चाहिए.
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि पीड़िता के बयान के अनुसार, न उसके और न ही आरोपी के कपड़े फटे थे. कपड़े उतारने या शरीर पर चोट के सबूत नहीं मिले. यानी दुष्कर्म के प्रयास के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. ऐसे में इसे दुष्कर्म की कोशिश नहीं बल्कि महिला के उसकी गरिमा और लज्जा को ठेस पहुचाये जाने का अपराध है.
हाईकोर्ट ने रद्द की चार साल की सजा
इन सब के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को इस आरोप से बरी किया है. कोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में सुनाई गई चार साल की सजा रद्द कर दी है. कोर्ट ने आरोपी पर से रेप के प्रयास की धारा को हटा दिया है. सजा को जेल में काटे गए समय ढाई महीने तक के लिए ही सीमित कर दिया गया. साथ ही उसपर उस पर 25 हजार रुपयों का जुर्माना भी लगाया है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सुनाया था ऐसा फैसला
बता दें, फरवरी माह में ऐसा ही फैसला यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि ‘महिला का स्तन पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा खोलना दुष्कर्म नहीं बल्कि यौन उत्पीड़न है. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.
वहीँ, दूसरे मामले में पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को दुष्कर्म के आरोपी को बरी करते हुए कहा था कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. यह महिला की गरिमा भंग करने का अपराध है.



