
Tamil Nadu News: मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के बहुचर्चित सथानकुलम पुलिस हिरासत हत्या मामले में आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. न्यायालय ने मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना को दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध मानते हुए दोषी ठहराए गए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है. न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मामला सत्ता के दुरुपयोग और अत्यधिक क्रूरता की पराकाष्ठा है.
यह घटना साल 2020 की है, जब पूरा देश कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की मार झेल रहा था. थूथुकुडी जिले के सथानकुलम में दुकान मालिक पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को पुलिस ने केवल इसलिए हिरासत में लिया था क्योंकि उन्होंने निर्धारित समय के बाद भी अपनी दुकान खुली रखी थी.
हिरासत के दौरान पुलिस स्टेशन में पिता-पुत्र को रात भर अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उनकी मौत हो गई. इस घटना ने न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ जन-आक्रोश फूट पड़ा था.
CBI की जांच और न्यायालय का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सीबीआई ने 2,427 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें साक्ष्यों के जरिए यह साबित किया गया कि पिता-पुत्र की हत्या एक सुनियोजित साजिश और बर्बरता का परिणाम थी.
सजा पाने वाले पुलिसकर्मी
न्यायालय ने इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर रघु गणेश और बालकृष्णन सहित 9 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया. एक अन्य आरोपी पॉलदुरई की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो गई थी.
फैसले का महत्व
यह फैसला देश में पुलिस सुधार और कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के खिलाफ एक कड़ा संदेश है. न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया कि वर्दी की आड़ में कानून हाथ में लेने वालों के लिए लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है. यह न्याय उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो सालों से इंसाफ का इंतजार कर रहे थे.




