Strait of Hormuz tension: दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज में मंगलवार को लगातार तीसरे हमले में एक और टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाने की खबर आई है. इसके बाद से एक बार फिर दुनियाभर में तेलगैस की किल्लत होने का खतरा बढ़ गया है. ब्रिटेन की मिलिट्री एजेंसी ने पुष्टि की है कि आज मंगलवार शाम तक तीन टैंकरों पर हमला हुआ. जो बीते कुछ दिनों में इस संवेदनशील रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जहाजों को निशाना बनाए जाने का सबसे बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है.

यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, तीसरे टैंकर पर ड्रोन हमला किया गया. हालांकि खुशकिस्मती से जहाज को मामूली सा नुकसान ही पहुंचा, लेकिन किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने की खबर नहीं आई है और टैंकर अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा.
न्यूज़ एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले मंगलवार को ही दो अन्य टैंकरों पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया. इनमें से एक टैंकर ओमान के तट के पास आग की चपेट में आया. ईरान के सरकारी टीवी ने दावा किया कि यह टैंकर कतर से लिक्वीफाइड नेचुरल गैस ले जा रहा टैंकर था, और इसने ईरान की बड़ी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था. हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली. दूसरे टैंकर की सटीक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी, लेकिन उसे संरचनात्मक नुकसान पहुंचा. राहत की बात यह रही कि उसमें भी कोई हताहत नहीं हुआ.
ईरान पर शक
तेहरान लंबे समय से कहता रहा है कि होर्मुज के अहम समुद्री रूट से गुजरने के लिए केवल वही समुद्री मार्ग सुरक्षित है जिसे ईरान मंजूरी देता है. ऐसे में ओमान के तट के करीब वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने वाले जहाजों पर पहले भी हमलों का संदेह ईरान पर जताया जाता रहा है. इस बीच अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के जरिए जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने, ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने और 28 फरवरी से जारी युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की कोशिश कर रहा है.
दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर असर का खतरा
शांतिकाल में दुनिया के कुल कारोबार होने वाले लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आवाजाही हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होती है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है.
अमेरिका ईरान वार्ता फिलहाल ठंडे बस्ते में
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की युद्ध की शुरुआत में हुई मौत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिलहाल उनके अंतिम संस्कार तक टाल दी गई है. खामेनेई के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और वहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारे भी लगाए गए.
यानी ईरान को खामेनेई को सुपुर्दे खाक करना था, इसलिए उसे भी कुछ दिन की शांति जरूरी थी. वहीं अमेरिका को भी अपने देश की आजादी की 250वीं सालगिरह मनाने के लिए स्थाई शांति की गरज थी, इसीलिएल दोनों सीजफायर को राजी हो गए थे. अब ईरान को 48 घंटों की और दरकार है. 9 जुलाई को खामेनेई को सुपुर्दे खाक कर दिया जाएगा. उसके बाद एक बार मिडिल ईस्ट का माहौल गरमाने के आसार हैं.
टैंकरों पर हमले के बाद कतर ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया है. कतरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने कतर के एलएनजी टैंकर ‘अल रेकय्यात’ पर हुए हमले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अस्वीकार्य हमला बताया. उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और कतर इस हमले के लिए ईरान को पूरी तरह कानूनी रूप से जिम्मेदार मानता है.



