Jamui/Koderma: बिहार के जमुई में सड़क किनारे एक नाबालिग लड़की और उसके दोस्त के साथ मनचलों द्वारा की गई अभद्रता और उधर पड़ोसी राज्य झारखंड के कोडरमा में तीन नाबालिगों को बिजली के खंभे से बांधकर गांव में घुमाने की घटना ने समाज की चेतना को झकझोर कर रख दिया है. एक तरफ जमुई में 7 दरिंदों ने अकेली नाबालिग लड़की को सड़क पर घेरकर नोचने का प्रयास किया, तो दूसरी तरफ कोडरमा में भीड़ ने खुद ही ‘जज’ बनकर तीन नाबालिग बच्चों को तालिबानी अंदाज में सजा सुना दी. ये दोनों घटनाएं साबित करती हैं कि समाज में मॉब जस्टिस और बेखौफ अपराधियों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है.

पहला केस बिहार के जमुई जिले का है. यहां टाउन थाना क्षेत्र में 19 सितंबर की शाम एक कोचिंग में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र और छात्रा के साथ सड़क पर रोककर अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की गई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 21 सितंबर को जब इस हैवानियत का वीडियो वायरल हुआ, तो हड़कंप मच गया. जमुई पुलिस ने मामले में BNS की धारा 74, 76 और पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और 12 के तहत FIR दर्ज की.
जमुई एसपी विश्वजीत दयाल के आदेश पर SDPO दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है. 7 पहचाने गए आरोपियों में से 3 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने जमुई डीएम से रिपोर्ट मांगी है. वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है.
कोडरमा केस: ग्रामीणों का ‘तालिबानी फरमान’, खंभे से बांधकर घुमाया
दूसरी ओर, झारखंड के कोडरमा जिले के लोचनपुर गांव में कानून को हाथ में लेने का शर्मनाक मामला सामने आया. रविवार देर रात एक अकेली नाबालिग लड़की से मिलने उसके दो नाबालिग दोस्त घर पहुंचे थे. सोमवार सुबह जब ग्रामीणों को इस बात की भनक लगी, तो आक्रोशित भीड़ ने तीनों नाबालिगों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों ने खुद ही ‘तालिबानी अदालत’ लगाई, तीनों बच्चों को पूरे गांव में घुमाया और फिर बिजली के खंभे से रस्सी से बांधकर माफी मंगवाई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तीनों बच्चों को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया और मामले की जांच शुरू की.
कानून और समाज पर खड़े होते 5 गंभीर सवाल
1 क्या किसी भी नागरिक या भीड़ को खुद कानून हाथ में लेने और सजा देने का हक है?
कानून क्या कहता है: भारतीय संविधान और कानून के तहत किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति को बंधक बनाना, मारपीट करना या खंभे से बांधना पूरी तरह गैरकानूनी है. न्याय तय करने का अधिकार सिर्फ अदालतों को है.
2 नाबालिगों के अधिकारों और संरक्षण का क्या?
कानून क्या कहता है: जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों की पहचान उजागर करना, उन्हें मानसिक या शारीरिक यातना देना संगीन जुर्म है. कोडरमा में ग्रामीणों ने नाबालिगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया है.
3 अकेली लड़की या प्रेमी जोड़े पर सवाल उठाने का नैतिक या कानूनी अधिकार भीड़ को किसने दिया?
कानून क्या कहता है: भारत का कानून हर नागरिक को निजता और स्वतंत्रता का अधिकार देता है. यदि कोई अपराध हुआ भी है, तो पुलिस को सूचना देना ही एकमात्र कानूनी प्रक्रिया है, न कि ‘मॉब जस्टिस’ करना.
4 समाज की चुप्पी और तमाशबीन बनने की प्रवृत्ति पर अंकुश कैसे लगे?
कानून और प्रक्रिया क्या कहती है: जब ऐसी घटनाएं सार्वजनिक स्थलों पर होती हैं, तो नागरिक अधिकार और नैतिक कर्तव्य यह मांग करते हैं कि लोग तमाशा देखने या वीडियो बनाने के बजाय तुरंत पुलिस हेल्पलाइन या चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचना दें. कानून में किसी भी पीड़ित की सहायता करने वाले नागरिक को पूरी सुरक्षा दी जाती है और उन्हें किसी भी तरह की कानूनी या पुलिसिया उलझन से दूर रखा जाता है. समाज में इस बात का व्यापक प्रचारप्रसार आवश्यक है कि अपराध को चुपचाप देखना और शेयर करना भी अपराध को बढ़ावा देने जैसा है.
5 अपराध के बाद पीड़ितों और परिवारों को कानूनी व मानसिक सहायता कैसे मिले?
कानून और प्रक्रिया क्या कहती है: पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के अनुसार, अपराध या प्रताड़ना का शिकार हुए बच्चों के पुनर्वास के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता, पेशेवर काउंसलिंग और पुनर्वास सहायता प्रदान की जाती है. समाज और परिजनों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे बिना किसी झिझक के ऐसी घटनाओं की सूचना संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों और पुलिस को दें, ताकि पीड़ितों को समय पर उचित परामर्श और न्याय मिल सके.



