Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कचरा प्रबंधन की स्थिति दिनबदिन विकराल होती जा रही है. दिल्ली में रोज पैदा होने वाले कुल कचरे में से 44 प्रतिशत कचरा बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे ओखला, भलस्वा और गाजीपुर स्थित ठसाठस भरे पड़े लैंडफिल स्थलों पर डंप किया जा रहा है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की ताजा रिपोर्ट में उजागर हुए ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली नगर निगम कचरे के लगातार बढ़ते उत्पादन के साथ तालमेल बिठाने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहा है. नए प्रोसेसिंग प्लांटों की परियोजनाओं में हो रही देरी और बारबार डेडलाइन बढ़ाए जाने के कारण राजधानी पर कचरे का संकट गहराता जा रहा है.

DPCC द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कचरे के उत्पादन और उसके निस्तारण में भारी अंतर देखा जा रहा है. दिल्ली में प्रतिदिन 13,862 टन कचरा पैदा हो रहा है. इसमें से केवल 55.84% कचरे का ही प्रसंस्करण हो पा रहा है. कुल कचरे का 44.16% प्रतिदिन बिना प्रोसेस हुए सीधे कचरे के पहाड़ों पर फेंका जा रहा है. पिछले साल इसी अवधि में रोज 11,842 टन कचरा निकलता था जिसमें से 4,534 टन असंसाधित रह जाता था. यानी पिछले वर्ष की तुलना में अब प्रतिदिन 1,597 टन अतिरिक्त कचरा बिना प्रोसेस हुए लैंडफिल में जमा हो रहा है.
60 फीसदी सूखा और 40 फीसदी गीला कचरा
नागरिक निकाय के अनुसार, गैरबायोडिग्रेडेबल कचरा 8,100 टन है. जबकि, बायोडिग्रेडेबल कचरा: 5,400 टन है.
‘Hindustan Times’ में छपी खबर के मुताबिक, नगर निगम अधिकारी ने बताया कि कई क्षेत्रों में ठेकेदारों के अनुबंध समाप्त होने और नए ठेकेदारों के आने के दौरान संक्रमण काल में संसाधनों की कमी हो गई है. इस वजह से ढलावों पर कचरे की छंटाई बंद हो गई है और घरेलू कचरे के साथ निर्माण मलबा भी मिलाजुला आ रहा है. दिल्ली के 12 में से तीन जोन इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
वेस्टटूएनर्जी प्लांटों की बदहाली और NGT की फटकार
वर्तमान में दिल्ली में भस्मीकरण को ही मुख्य जरिया बनाया गया है. दिल्ली में अभी 4 वेस्टटूएनर्जी प्लांट कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 6,550 TPD है. गाजीपुर वेस्टटूएनर्जी प्लांट के बारबार खराब होने और ठीक से चालू न रहने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एमसीडी की खिंचाई की है. ओखला स्थित 200 TPD क्षमता का कंपोस्टिंग प्लांट कई सालों से बंद पड़ा है और इसे बायोसीएनजी में अपग्रेड करने का प्रोजेक्ट सालों से अटका हुआ है.
मास्टर प्लान 2047 और भविष्य की योजनाएं
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने क्षमता विस्तार का रोडमैप तैयार किया है. ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ के मुताबिक, राजधानी में रोजाना कचरा उत्पादन बढ़कर 25,000 टन तक पहुंचने की संभावना है. एमसीडी नरेलाबवाना, तेहखंड, ओखला और गाजीपुर में नए संयंत्र स्थापित कर और मौजूदा प्लांटों का विस्तार कर दिसंबर 2028 तक 8,150 टन प्रति दिन की अतिरिक्त प्रसंस्करण क्षमता जोड़ने का दावा कर रही है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सिंघाओला, नरेला, भलस्वा और ओखला में नए प्रोसेसिंग प्लांट्स की प्रक्रिया जारी है.
विशेषज्ञों की सलाह: विकेंद्रीकरण और खाद बनाने पर जोर
पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल कचरा जलाने वाले वेस्टटूएनर्जी प्लांटों पर निर्भर रहना पर्यावरण के अनुकूल नहीं है. दिल्ली सरकार और एमसीडी को कचरे के विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण, स्रोत पर ही कचरे के पृथक्करण और गीले कचरे से बड़े पैमाने पर कंपोस्टिंग की नीति को अपनाना चाहिए.



