Dungarpur News: राजस्थान के डूंगरपुर जिले में जिला प्रशासन की एक बेहद गंभीर और संवेदनहीन कार्यप्रणाली सामने आई है. गंभीर हृदय रोग से पीड़ित और शरीर में पेसमेकर लगे एक शारीरिक शिक्षक द्वारा चिकित्सा दस्तावेजों के साथ चुनाव ड्यूटी कैंसिल करने के आवेदन के बावजूद प्रशासन ने उनकी ड्यूटी लगा दी. इसके परिणामस्वरूप चुंडावाड़ा क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी के दौरान अत्यधिक शारीरिक तनाव और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण शिक्षक को आपातकालीन स्थिति में डूंगरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है.

जानकारी के मुताबिक, बिछीवाड़ा पंचायत समिति के चुंडावाड़ा क्षेत्र में कार्यरत शारीरिक शिक्षक सोमेश्वर लंबे समय से गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे हैं. मार्च 2025 में उदयपुर के गीतांजलि अस्पताल में उनके दिल का बड़ा ऑपरेशन हुआ था और उनके शरीर में पेसमेकर लगाया गया था. डॉक्टरों ने उन्हें किसी भी प्रकार का अत्यधिक शारीरिक या मानसिक तनाव न लेने, हर दो घंटे के काम के बाद विश्राम करने तथा खानपान में अत्यधिक सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी थी.
“जब स्कूल जा सकते हैं तो चुनाव ड्यूटी क्यों नहीं?”
शिक्षक सोमेश्वर ने एडीएम प्रकाश रैगर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। शिक्षक ने अपनी गंभीर बीमारी, अस्पताल की रिपोर्ट्स और पेसमेकर से संबंधित सभी मेडिकल दस्तावेज एडीएम प्रकाश रैगर के समक्ष प्रस्तुत कर चुनाव ड्यूटी से राहत देने की गुहार लगाई थी. आरोप है कि एडीएम प्रकाश रैगर ने बीमारी की गंभीरता को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए कहा ‘जब आप इस हालत में स्कूल में पढ़ा सकते हैं, तो चुनाव ड्यूटी क्यों नहीं कर सकते?’ इसके बाद उन्होंने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया, जिससे शिक्षक को विवश होकर चुनाव ड्यूटी पर जाना पड़ा.
ड्यूटी के दौरान घबराहट और चक्कर: पुलिसकर्मियों ने दी तुरंत मदद
चुंडावाड़ा में चुनाव ड्यूटी के दौरान शिक्षक की स्थिति अचानक बिगड़ने लगी. शारीरिक तनाव और खानपान में असंतुलन के चलते शिक्षक सोमेश्वर को घबराहट, चक्कर आने, पेट फूलने और अत्यधिक पसीना आने लगा, जिससे उनकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया. स्थिति बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत उनके जूतेमोजे उतारे और पैरों की मालिश की. इसके बाद 108 एम्बुलेंस के जरिए उन्हें बिछीवाड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. बिछीवाड़ा में प्राथमिक उपचार और बीपी चेक करने के बाद डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत डूंगरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया.
शिक्षक संघों में आक्रोश, प्रशासन के रुख पर सवाल
इस घटना के बाद जिले के शिक्षक संगठनों और सरकारी कर्मचारियों में भारी आक्रोश है. गंभीर बीमारी के बावजूद संवेदनहीनता दिखाने और पेसमेकर लगे कार्मिक की अर्जी खारिज करने को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.



