
बिहार के एक पुराने मामले में पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की सजा में बदलाव किया है. मामला साल 2010 का है, जब एक विधवा महिला ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद ऐनुल हक रात में उसकी झोपड़ी में घुसा और उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की.
निचली अदालत ने उसे दुष्कर्म का दोषी मानते हुए चार साल की जेल की सजा सुनाई थी. लेकिन अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूत दुष्कर्म का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे. अदालत ने दुष्कर्म की सजा बदलकर महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला करने के अपराध में दोषसिद्धि कर दी और 25 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया.
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10 पॉइंट में समझिए पूरा मामला
1. मामला कब और कहां का है?
यह मामला बिहार के बेगूसराय जिले का है. घटना 8 फरवरी 2010 की रात की बताई गई है. पीड़ित महिला विधवा थी और एक झोपड़ी में रहती थी. बाद में इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में हुई, जहां आरोपी को दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया था.
2. महिला ने क्या आरोप लगाया था?
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रात करीब 10 बजे मोहम्मद ऐनुल हक महिला की झोपड़ी में घुसा. आरोप था कि उसने महिला का मुंह दबाया और गलत इरादे से उसके शरीर पर चढ़ गया. महिला ने इसे लेकर शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोग वहां पहुंच गए.
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3. शोर सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे
अभियोजन की कहानी के अनुसार, महिला के शोर मचाने पर करीब 10 से 15 ग्रामीण मौके पर पहुंचे. इनमें महिला का पड़ोसी भी शामिल था. ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ लिया. इस घटना के बाद मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंचा.
4. ट्रायल के दौरान गवाहों ने क्या किया?
मुकदमे की सुनवाई के दौरान महिला को छोड़कर बाकी सभी गवाह अपने पहले के बयानों से मुकर गए. यानी अभियोजन पक्ष को महिला की गवाही के अलावा दूसरे गवाहों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. हाईकोर्ट में मामले की समीक्षा के दौरान यह पहलू भी सामने रहा.
5. मेडिकल और दूसरे सबूतों को लेकर क्या बात सामने आई?
हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने चोट, खरोंच या अन्य शारीरिक नुकसान से जुड़ा मेडिकल सबूत पेश नहीं किया. इसके अलावा फटे या अस्त-व्यस्त कपड़ों जैसे भौतिक साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराए गए, जो आरोप की पुष्टि कर सकते थे.
6. हाईकोर्ट ने महिला की गवाही पर क्या कहा?
जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन किया. अदालत ने कहा कि महिला की गवाही को स्वीकार करने पर भी प्रस्तुत साक्ष्य दुष्कर्म का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे. अदालत के अनुसार, उपलब्ध सामग्री से अधिकतम आपराधिक अतिक्रमण और हमला किए जाने का मामला बनता था.
7. निचली अदालत ने पहले क्या सजा सुनाई थी?
बेगूसराय की ट्रायल कोर्ट ने 29 जुलाई 2013 को मोहम्मद ऐनुल हक को विधवा महिला से दुष्कर्म का दोषी ठहराया था. उसे चार साल की जेल और जुर्माने की सजा दी गई थी. आरोपी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की.
8. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने सजा में क्या बदलाव किया?
हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के अपराध में दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा. अदालत ने आरोपी को महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला करने के अपराध में दोषी माना. इस तरह निचली अदालत के फैसले में बदलाव किया गया और दुष्कर्म की सजा की जगह दूसरे अपराध में दोषसिद्धि तय हुई.
9. अब आरोपी पर कितना जुर्माना लगाया गया?
हाईकोर्ट ने मोहम्मद ऐनुल हक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि तीन सप्ताह के भीतर महिला को दी जाए. इस तरह फैसले में सजा बदलने के साथ महिला को आर्थिक मुआवजा देने का निर्देश भी शामिल रहा.
10. फैसले में सुप्रीम कोर्ट के किन मामलों का हवाला दिया गया?
फैसला सुनाते समय जस्टिस संदीप कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के दो पुराने फैसलों का संदर्भ लिया. इनमें Aman Kumar vs State of Haryana (2004) और Rupan Deol Bajaj vs KPS Gill (1995) शामिल हैं. हाईकोर्ट ने इन फैसलों का उल्लेख संबंधित अपराध और उपलब्ध साक्ष्यों के कानूनी आकलन के संदर्भ में किया.



