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Fake Matrimonial Website In Agra: आपको याद होगा कि साल 2015 में ‘डॉली की डोली’ नाम की एक बॉलीवुड फिल्म रिलीज हुई थी, जिसमें हीरोइन एक नकली दुल्हन बनकर कई लड़कों से शादी करती थी, लेकिन सुहागरात के दौरान दूल्हे को नशीली चीज खिलाकर उसके घर के सारे गहने और कैश लूट कर भाग जाती थी. इस काम को अंजाम देने में उसका साथ उसके नकली रिश्तेदार देते थे. ऐसी ही एक ठगी का मामला आगरा में आया है, हालांकि फ्रॉड का तरीका ऑनलाइन था.

फेक मैट्रिमोनियल वेबसाइट से फ्रॉड

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसी मैट्रिमोनियल वेबसाइट का पर्दाफाश किया है जो लड़कों को दुल्हनों से मिलाने का दावा करती थी, लेकिन असल में ये एक बड़ा फ्रॉड था. जांच करने वालों का कहना है कि प्रोफाइल फर्जी थीं और आगरा के एक कॉल सेंटर में काम करने वाली महिलाएं दुल्हन या उनके रिश्तेदारों का नाटक करती थीं.

कैसे नजर में आया फर्जीवाड़ा?

ये मामला तब सामने आया जब दिल्ली के एक शख्स ने ‘ShaadiPartner.com’ वेबसाइट के जरिए 15000 रुपये गंवाने की शिकायत की. पुलिस के मुताबिक, बाद में उसे पता चला कि जिस महिला से वो बात कर रहा था, वो असल में एक टेली-कॉलर थी.

दिल्ली के डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर मिली शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. पुलिस ने पेमेंट को ‘M/s Shaadi Partner Com’ से जुड़े सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते तक ट्रेस किया. बैंकिंग रिकॉर्ड से पता चला कि जया इसकी मालिक और ऑथराइज्ड सिग्नेटरी थी. बताया जा रहा है कि यही अकाउंट भारत के अलग-अलग हिस्सों से आई 6 अन्य शिकायतों से भी जुड़ा था.

फिल्मी स्टाइल में ठगी

पुलिस ने बताया कि टेली कॉलर शादी की ख्वाहिश रखने वाले लड़कों की तलाश करते थे और इंटरनेट से ली गई तस्वीरें भेजने से पहले उनकी फाइनेंशियल कंडीशन का अंदाजा लगाते थे. मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर फर्जी प्रोफाइल भी बनाई जाती थीं. जब कोई मर्द दिलचस्पी दिखाता, तो एक महिला कर्मचारी होने वाली दुल्हन बनकर उसे फोन करती थी. बातचीत हफ्तों तक चलती थी, जिससे रिश्ता असली लगने लगता था.

आखिरकार, मांगलिक दोष, परिवार की आपत्तियों या कहीं और सगाई हो जाने जैसे कारणों से रिश्ते को ठुकरा दिया जाता था. ग्राहकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए और प्रोफाइल और यहां तक कि फर्जी परिवार के सदस्यों के कॉन्टैक्ट्स भी दिए जाते थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस तरह लड़के जाल में फंस जाते थे.

मेंबरशिप पैकेज की कीमत 2500 रुपये से 15000 रुपये के बीच थी. पुलिस ने बताया कि कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि वे हर शख्स को 15,000 रुपये से कम का ही चूना लगाएं; इसे जांचकर्ताओं ने ‘छोटा धोखा, ज्यादा लोगों के साथ धोखा’ (cheat small, cheat many) वाला मॉडल बताया.

कॉल सेंटर का पर्दाफाश

पुलिस ने बताया कि कर्मचारियों को जॉब प्लेटफॉर्म और अखबार के विज्ञापनों के जरिए भर्ती किया जाता था. उन्हें 6000-7000 रुपये की सैलरी के साथ-साथ कलेक्शन से जुड़े इंसेंटिव भी मिलते थे. 4 सितंबर को आगरा के कॉल सेंटर पर छापा मारा गया. जया को गिरफ्तार किया गया, जबकि 8 महिला टेली-कॉलर्स को हिरासत में लिया गया. बाद में पुलिस ने तकनीकी निगरानी के जरिए पता लगाकर 8 सितंबर को आगरा में ही मुख्य आरोपी कुमार को गिरफ्तार किया.

जांचकर्ता 47 मोबाइल फोन, 7 डेस्कटॉप सीपीयू, व्हाट्सएप चैट और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. पुलिस को शक है कि पीड़ितों की संख्या हजारों में हो सकती है और उन्होंने प्रभावित लोगों से कहा है कि वो ट्रांजैक्शन की जानकारी के साथ इस धोखाधड़ी की रिपोर्ट करें.