नई दिल्ली: रक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश और हर साल करोड़ों रुपये के काम का सपना दिखाकर देशभर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने एक फर्जी अमेरिकी रक्षा प्रोजेक्ट और कथित ‘इंडोयूएस पैसिफिक पीस ट्रीटी’ के नाम पर कई कंपनियों को अपने जाल में फंसाया। मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद के वेंकिता वेंकट और दिल्ली के राहुल नायर और हितेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि आरोपियों ने भारत में अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए हथियार बनाने और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू होने की कहानी तैयार की थी।
मामला बेंगलुरु की टेक्नोलॉजी कंपनी SRIT इंडिया लिमिटेड से भी जुड़ा है। एफआईआर के अनुसार, कंपनी के डायरेक्टर डॉ. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मधु नांबियार का मई 2023 के आसपास VPVV टेक्नो कंस्ट्रक्शन से संपर्क हुआ था। इसके बाद दिल्ली के वसंत विहार स्थित कंपनी के कार्यालय में कई बैठकें हुईं।
इन बैठकों में कथित तौर पर कंपनी के प्रतिनिधियों ने खुद को भारत और विदेशों में बड़े प्रोजेक्ट कराने वाली संस्था बताया। उन्होंने दावा किया कि ‘इंडोयूएस पैसिफिक पीस ट्रीटी’ के तहत भारत में रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू होने वाले हैं।
आरोपियों ने प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण, इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाएं, साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटी और सर्विलांस जैसे काम शामिल होने की बात कही। कंपनी को भरोसा दिलाया गया कि उसे वर्ष 2050 तक हर साल करीब 500 करोड़ रुपये के वर्क ऑर्डर मिल सकते हैं।
इस बड़े वादे के बाद SRIT को प्रोजेक्ट का टेक्नोलॉजी पार्टनर बनने के लिए तैयार किया गया। आरोप है कि जालसाजों ने भरोसा बढ़ाने के लिए सरकारी दस्तावेज, मुहरें और अन्य कागजात भी दिखाए। इसके बाद कंपनी से 1.75 करोड़ रुपये की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट राशि जमा कराई गई।
बाद में जब कंपनी को प्रोजेक्ट और भुगतान को लेकर संदेह हुआ और दस्तावेजों की वास्तविकता पर सवाल उठे, तब कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि देशभर में कितनी कंपनियों और निवेशकों को इस कथित फर्जी प्रोजेक्ट के नाम पर निशाना बनाया गया और ठगी की कुल रकम कितनी है।



