देश में भिक्षावृत्ति यानी भीख मांगने की समस्या कितनी कम हुई है? क्या सरकार की योजनाओं से लोगों को इस मजबूरी से बाहर निकालने में सफलता मिल रही है? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए सरकारी आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में भिखारियों और बेघर घूमने वाले लोगों की कुल संख्या 4,13,670 थी.

इनमें 2,21,673 पुरुष और 1,91,997 महिलाएं शामिल थीं. यह आंकड़ा 15 साल से ज्यादा पुराना है. सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए नए आंकड़े बताते हैं कि भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की पहचान और उनके रिहैबिलिटेशन के लिए अभियान चलाया जा रहा है. केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्माइलभिखारी योजना इसी समस्या को दूर करने के लिए चलाई जा रही है.
क्या दिखाते हैं हालिया आंकड़ें?
इसका मकसद जरूरतमंद लोगों को सड़कों से हटाना भर नहीं, बल्कि उन्हें आश्रय, इलाज, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना है, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें. मंत्रालय के 14 अक्टूबर 2026 के लिए उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत अब तक 45,073 लोगों की पहचान की गई है और 13,134 लोगों को रिहैबिलिटेशन सहायता मिली है.
29 फीसदी लोगों को मिली है सहायता
इसका मतलब है कि पहचाने गए लोगों में से करीब 29 प्रतिशत को सहायता मिल चुकी है. हालांकि, पहचान किए गए लोगों और देश में मौजूद भिखारियों की कुल संख्या के बीच अंतर समझना जरूरी है. इन आंकड़ों के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि देश में भिखारियों की संख्या इतनी कम हो गई है.
देश में भिखारियों की संख्या कितनी थी?
भारत में भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों की संख्या का व्यापक सरकारी आंकड़ा 2011 की जनगणना से मिलता है. उस समय देश में भिखारियों और बेघर घूमने वाले लोगों की कुल संख्या 4.13 लाख से ज्यादा दर्ज की गई थी.
कुल संख्या: 4,13,670 लोग
पुरुष: 2,21,673
महिलाएं: 1,91,997
जानिए 2011 में कैसा था आंकड़ों का हाल?
केंद्र सरकार की ओर से 11 अगस्त 2021 को जारी जानकारी के मुताबिक, 2011 की जनगणना में देशभर में भीख मांगने वाले लोगों की संख्या 4,13,670 दर्ज की गई थी. इनमें 2,21,673 पुरुष और 1,91,997 महिलाएं थीं. राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 81,244 लोग भीख मांगने के काम में लगे थे. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 65,835, बिहार में 29,723, मध्य प्रदेश में 28,695, राजस्थान में 25,853 और महाराष्ट्र में 24,307 लोग दर्ज किए गए. वहीं, दिल्ली में ऐसे लोगों की संख्या 2,187 थी.
कितने लोगों का रिहैबिलिटेशन हुआ?
सरकार ने भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की मदद के लिए स्माइल योजना के तहत विशेष कार्यक्रम शुरू किया है. 14 अक्टूबर 2026 के लिए उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 45,073 लोगों की पहचान हुई है. इनमें से 13,134 लोगों को रिहैबिलिटेशन सहायता दी गई है. इसका अर्थ है कि पहचाने गए लोगों में से करीब 29.2 प्रतिशत लोगों को सहायता मिल चुकी है. बाकी लोगों के लिए भी पहचान, सहायता और रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत है.
भीख छोड़ने के बाद क्या है सहारा?
हालांकि, रिहैबिलिटेशन सहायता मिलने का मतलब हर मामले में स्थायी रोजगार मिल जाना या व्यक्ति का हमेशा के लिए भिक्षावृत्ति छोड़ देना नहीं है. स्थायी बदलाव का आकलन करने के लिए यह देखना होगा कि कितने लोग लंबे समय तक रोजगार, सुरक्षित आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े रहते हैं. मंत्रालय के मुताबिक, स्माइलभिखारी योजना देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 216 शहरों में लागू है. इसके तहत लोगों की पहचान कर उन्हें जरूरत के मुताबिक सहायता दी जाती है.
योजना में कई तरह के कदम शामिल हैं:
- जरूरतमंद लोगों की पहचान और उनकी स्थिति का आकलन
- आश्रय, भोजन और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा
- परामर्श, शिक्षा और कौशल विकास के अवसर
- रोजगार और आजीविका के साधनों से जोड़ने की कोशिश
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद
सरकार का लक्ष्य है कि लोग लंबे समय तक दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आजीविका कमा सकें. योजना के तहत शहरों में किए जा रहे काम की निगरानी के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है.
2031 तक क्या है सरकार का लक्ष्य?
सरकार ने आने वाले वर्षों में भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों के रिहैबिलिटेशन का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई है. जुलाई 2026 में जारी मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 203031 तक योजना के तहत 35,000 लोगों को शामिल करने और रिहैबिलिटेशन सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है. योजना का विस्तार मौजूदा 216 शहरों से आगे बढ़ाकर 295 शहरों तक करने की भी योजना बताई गई है.
दिल्ली में 400 लोगों को मिला रोजगार
दिल्ली में पिछले 18 महीनों में 400 से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है, सरकार का लक्ष्य 2031 तक 100 शहरों को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाना है. केंद्र सरकार की SMILE योजना के तहत मार्च 2026 तक भीख मांगने के काम में लगे 31,055 लोगों की पहचान हुई थी और 9,935 लोगों का रिहैबिलिटेशन किया गया था. योजना के लिए 202126 की अवधि में 390 करोड़ रुपये अलॉट किए गए थे.
जुलाई 2026 की सरकारी जानकारी के मुताबिक, यह योजना देश के 216 शहरों में चल रही थी. सरकार ने वित्त वर्ष 203031 तक 35,000 लोगों के रिहैबिलिटेशन का लक्ष्य रखा है. इसके तहत लोगों को कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, काउंसलिंग और रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था है.
सरकार ने चलाई हैं कई सारी योजनाएं:
- SMILE योजना
SMILE योजना केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू की गई. इसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में लगे लोगों का रिहैबिलिटेशन करना है. इसके तहत आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.
- दीनदयाल अंत्योदय योजनाराष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन
इस योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर देना है. इसके अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों को सहायता और बेघर लोगों के लिए आश्रय की व्यवस्था की जाती है. इससे आर्थिक कमजोरी कम करने और लोगों को भीख मांगने की मजबूरी से बाहर निकालने में मदद मिल सकती है.
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
इस योजना का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल का प्रशिक्षण देना है. प्रशिक्षण के माध्यम से वे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने योग्य बन सकते हैं. भिक्षावृत्ति करने वाले पात्र व्यक्तियों को भी उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों से लाभ मिल सकता है. यह योजना सीधे भिक्षावृत्ति समाप्त करने के लिए नहीं बनाई गई है.
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
इस योजना का उद्देश्य नए सूक्ष्म उद्योग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता देना है. पात्र आवेदकों को बैंक ऋण और सरकारी सब्सिडी मिल सकती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे लोग अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं और आय अर्जित कर सकते हैं. यह योजना अप्रत्यक्ष रूप से गरीबी और आर्थिक असुरक्षा कम करने में सहायक है.
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम
इस कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांग व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जाती है. इसका उद्देश्य कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है. नियमित वित्तीय सहायता से उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और आर्थिक मजबूरी के कारण भीख मांगने की आशंका कम हो सकती है.



