Saturday, April 11, 2026
Health

भारत के इन 5 मंदिरों से भूलकर भी घर न लाएं प्रसाद, वरना शुरू हो जाएगा मुसीबतों का दौर!..

भारत के इन 5 मंदिरों से भूलकर भी घर न लाएं प्रसाद, वरना शुरू हो जाएगा मुसीबतों का दौर!..

5 Mysterious Temples in India: भारत में अनेक प्रचीन और रहस्यमयी मंदिर मौजूद हैं. जब कभी भी हम भगवान के मंदिरों में जाते हैं, तो वहां मिलने वाले प्रसाद को अपने साथ घर लेकर चले आते हैं. लेकिन 5 रहस्यमयी मंदिर ऐसे हैं, जहां का प्रसाद घर लाना बेहद अपशकुन माना जाता है. आइए जानते हैं भारत के उन 5 रहस्यमी मंदिरों के बारे में.

अपशकुन है इन मंदिरों से प्रसाद लाना
भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनकी महिमा और रहस्य आज भी वैज्ञानिकों और भक्तों को हैरान कर देते हैं. आमतौर पर जब हम किसी मंदिर में जाते हैं, तो वहां से मिलने वाला प्रसाद भगवान के आशीर्वाद के रूप में अपने साथ घर लाते हैं. लेकिन, हमारे देश में कुछ ऐसे भी दिव्य स्थान हैं जहां की परंपराएं बिल्कुल अलग हैं. मान्यतानुसार, इन मंदिरों में चढ़ाया गया प्रसाद न तो आप घर ले जा सकते हैं और न ही उसे ग्रहण करना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं ऐसे 5 रहस्यमी मंदिरों के बारे में, जहां से प्रसाद लाना अपशकुन माना जाता है.

कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित इस अद्भुत मंदिर में एक करोड़ शिवलिंग स्थापित हैं. यहां की मान्यता के अनुसार, भगवान शिव पर चढ़ाया गया प्रसाद ‘चंडेश्वर'(शिव के एक गण) का माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग के ऊपरी भाग को स्पर्श कर निकलने वाले प्रसाद को मनुष्य ग्रहण नहीं कर सकता. इसे सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से देखा जाता है, इसे खाना या घर ले जाना अपशकुन माना जाता है.

नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल की पहाड़ियों में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक नैना देवी मंदिर अपनी अद्भुत शक्ति के लिए प्रसिद्ध है. यहां माता रानी को चढ़ाया गया भोग सिर्फ मंदिर की सीमा के भीतर ही ग्रहण किया जा सकता है. परंपरा है कि अगर कोई भक्त इस प्रसाद को भूलकर भी मंदिर परिसर से बाहर या अपने घर ले जाता है, तो उसे भारी कष्टों का सामना करना पड़ सकता है.

काल भैरव मंदिर, उज्जैन
उज्जैन के सेनापति कहे जाने वाले काल भैरव मंदिर में परंपराएं बेहद अनोखी हैं. यहां भगवान को शराब का भोग लगाया जाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह प्रसाद सिर्फ भैरव बाबा को चढ़ाने के लिए होता है. आम भक्तों के लिए इस प्रसाद को स्पर्श करना या उसका सेवन करना पूरी तरह वर्जित है. इसे न तो बांटा जाता है और न ही घर ले जाने की अनुमति दी जाती है.

मेहंदीपुर बालाजी, राजस्थान
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर अपनी तांत्रिक शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए जाना जाता है. इस मंदिर से जुड़ा नियम सबसे कठिन है. यहां जो प्रसाद चढ़ाया जाता है, उसे भक्त को वहीं छोड़ना पड़ता है. इसे न तो खाया जाता है और न ही किसी को दिया जाता है. यहां तक कि मंदिर से बाहर निकलते समय भक्त को पीछे मुड़कर देखने की भी मनाही होती है.

कामाख्या देवी मंदिर, असम
असम का कामाख्या मंदिर तंत्र-मंत्र की साधना का सबसे बड़ा केंद्र है. यहां मां के मासिक धर्म के तीन दिनों के दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं. इन विशेष दिनों में मंदिर के भीतर का कोई भी पदार्थ या प्रसाद ग्रहण करना पूरी तरह वर्जित होता है. यहां के कड़े नियमों का पालन न करना अमंगलकारी माना गया है.

me.sumitji@gmail.com

Leave a Reply