नई कार खरीदने के बाद उसकी पहली सर्विस सबसे अहम मानी जाती है. कई लोग इसे सिर्फ एक सामान्य चेकअप समझकर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन यही वह समय होता है जब कार के इंजन, ब्रेक, टायर और दूसरे जरूरी हिस्सों की अच्छी तरह जांच होती है. अगर इस दौरान आप सही जानकारी ले लें और कुछ जरूरी सवाल पूछ लें, तो आगे चलकर बड़ी दिक्कतों और फालतू खर्च से बच सकते हैं.

पहली सर्विस में क्याक्या चेक किया जाएगा?

हर कार का सर्विस प्लान अलग हो सकता है, लेकिन पहली सर्विस में आमतौर पर इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, ब्रेक, टायर प्रेशर और दूसरे जरूरी फ्लूइड्स की जांच की जाती है.

सर्विस सेंटर पर मैकेनिक से जरूर पूछें कि इंजन ऑयल बदला जाएगा या सिर्फ उसकी जांच होगी. साथ ही यह भी जान लें कि कार के किनकिन हिस्सों की जांच की जाएगी और क्या किसी तरह का सॉफ्टवेयर अपडेट भी किया जाएगा. कई कंपनियां पहली सर्विस में इंजन ऑयल नहीं बदलतीं, बल्कि सिर्फ उसकी स्थिति जांचती हैं.

अगर कोई पार्ट बदलने की बात हो, तो वजह जरूर पूछें

नई कार की पहली में आमतौर पर किसी बड़े पार्ट को बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर सर्विस सेंटर का कर्मचारी किसी पार्ट को बदलने की सलाह देता है, तो पहले उसकी वजह समझें.

यह भी पूछें कि लगाया जाने वाला पार्ट कंपनी का ओरिजिनल है या नहीं और उस पर कितनी वारंटी मिलेगी. इससे आपको बेवजह का खर्च करने से बचने में मदद मिलेगी.

क्या पूरी सर्विस फ्री होगी?

ज्यादातर कंपनियां पहली और दूसरी सर्विस बिना सर्विस चार्ज के देती हैं, लेकिन कुछ अतिरिक्त काम या पार्ट्स के लिए अलग से पैसे देने पड़ सकते हैं.इसलिए पहले ही साफ कर लें कि कौनकौन सी सेवाएं मुफ्त हैं, किन चीजों के लिए पैसे लगेंगे और कुल कितना खर्च आने की संभावना है.

अगली सर्विस कब करानी होगी?

पहली सर्विस के बाद अगली सर्विस की सही तारीख या तय किलोमीटर की जानकारी जरूर लें.मैकेनिक से पूछें कि अगली सर्विस कितने किलोमीटर चलने के बाद या कितने महीने में करानी होगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हो सके तो यह जानकारी लिखित में भी ले लें, ताकि बाद में कोई भ्रम न रहे.

क्या कार में कोई कमी या दिक्कत मिली?

सर्विस पूरी होने के बाद यह जरूर पूछें कि जांच के दौरान कार में कोई समस्या तो नहीं मिली.अगर ब्रेक पैड, टायर, बैटरी या किसी दूसरे हिस्से में घिसावट, लीकेज या कोई और खराबी दिखाई दी है, तो उसकी पूरी जानकारी लें. समय रहते छोटी समस्या ठीक कराने से आगे चलकर बड़ी परेशानी और ज्यादा खर्च से बचा जा सकता है.