पालमपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा है कि वर्तमान समय में केवल डिग्री हासिल कर लेना ही काफी नहीं है। आज देश को एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, आत्मविश्वास, रोजगार क्षमता और उद्यमिता (Entrepreneurship) के अवसर प्रदान करे।राज्यपाल कांगड़ा जिले के पालमपुर स्थित श्री साई विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

विश्वविद्यालय केवल शिक्षा नहीं, सामाजिक बदलाव का माध्यम
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान, मूल्यों, अनुसंधान, नवाचार और समाज में उसके योगदान से तय होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में बधानी से शुरू हुई श्री साई ग्रुप की शैक्षणिक यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों का एक अनुकरणीय उदाहरण है।
हिमाचल प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्र पर्वतीय, ग्रामीण और दूरदराज के हैं। ऐसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का एक महत्वपूर्ण जरिया भी है, जो स्थानीय युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलता है।
दूरदर्शी सोच और 50 वर्षों की चुनौतियों की तैयारी
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रभाव केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों को प्रभावित करता है। दूरदर्शी नेतृत्व को न केवल वर्तमान आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि अगले 20, 30 और 50 वर्षों की संभावनाओं व चुनौतियों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनानी चाहिए।
‘नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें छात्र’
भारत को एक युवा राष्ट्र बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही उपयोग करने के लिए विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत (Industry) के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना होगा। छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा, “आपका लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं होना चाहिए। आपको इस योग्य बनना चाहिए कि आप दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।” उन्होंने कहा कि आज भारत में स्टार्टअप्स और इनोवेशन का एक बेहतरीन माहौल बन रहा है, जहाँ छात्रों को समस्या-समाधानकर्ता (Problem Solvers) और उद्यमी बनने की दिशा में काम करना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और पर्वतीय शिक्षा पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर बल दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों और पर्वतारोहण (Mountaineering) से जुड़ी गतिविधियों पर दिए जा रहे ध्यान की सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारे पहाड़ केवल हमारी पहचान नहीं हैं, बल्कि ये पर्यटन, साहसिक खेल, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार के मुख्य आधार हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। विश्वविद्यालय को इस क्षेत्र में शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और शोध का एक अनुकरणीय मॉडल विकसित करना चाहिए।”
छात्रों को सफलता के तीन मूल मंत्र
युवाओं को विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए राज्यपाल ने उन्हें अनुशासन, कड़ी मेहनत और ईमानदारी को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे असफलता से न डरें, क्योंकि असफलता अंत नहीं बल्कि सीखने और सुधार करने का एक मौका है।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इससे पहले श्री साई विश्वविद्यालय के चांसलर एस.के. पुंज ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्थान की उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस अवसर पर कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा, कुलपति प्रो. वी.पी. पटियाल, प्रबंध निदेशक तृप्ता पुंज, प्रो-चांसलर तुषार पुंज और उपाध्यक्ष रिया पुंज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



