Why Free Balochistan Matters to Pakistan: पाकिस्तान बातें कितनी भी हांकता रहे, इस वक्त उसके अंदरूनी हालात किसी से छिपे नहीं. ये देश दो मोर्चों पर गंभीर संकट का सामना कर रहा है. एक तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आर्थिक मुद्दों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में अलगाववाद की आग तेज हो गई है. लंबे समय से पाकिस्तानी हुकूमत से खुद को अलग मान रहे बलूचिस्तान ने आजादी घोषित करने का दावा किया है, जो पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान का उस पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया, वो खुद एक अलग मुल्क मान रहा है.

अब मुद्दा ये है कि बलूचिस्तान की ये घोषण क्यों इस्लामाबाद के लिए इस वक्त इतना मायने रखती है? दरअसल PoK में पिछले कई महीनों से लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं. बढ़ती महंगाई, बिजली के दाम, गेहूंआटे की कमी और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों की मांग मुख्य मुद्दे हैं. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में 2026 में बड़े प्रदर्शन हुए, जिनमें हिंसक झड़पें भी हुईं. इसी बीच बलूचिस्तान में स्थिति और गंभीर है. 17 जुलाई को मस्तुंग के पास बालोच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सुरक्षा काफिले पर हमला किया और 45 सैनिक मार गिराये. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उसी दिन 5 आम नागरिकों की मौत हुई और 11 घायल हुए. रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई के पहले सप्ताह में बलोचिस्तान में 42 सुरक्षा कर्मी मारे गए.
चीन का प्रोजेक्ट ही आ जाएगा खतरे में
CPEC चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है. ग्वादर पोर्ट, सड़कें, ऊर्जा परियोजनाएं और चीन के कर्मचारी तक बलोचिस्तान में हैं. बढ़ते हमलों से सुरक्षा खर्च बढ़ रहा है, निर्माण कार्य रुक रहे हैं और चीनी कर्मचारियों की सुरक्षा चिंता का विषय बन गई है. अगर पाकिस्तान बलोचिस्तान पर नियंत्रण खोता है, तो चीन का अरब सागर तक का सपना कमजोर पड़ सकता है.



