
देहरादूनः हाल ही में जिस दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया था, उस पर बने फ्लाईओवर की दीवार दरक गई है. बताया जा रहा है कि गणेशपुर के पास यह फ्लाईओवर बना हुआ है. इस मामले के उजागर होने के बाद एनएचआई में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है. 20 एंकर प्लेटस लगाकर दरार रोकी गई है. पिछली बरसात में एलिवेटेड रोड के 24 पिलर भी कमजोर पाए गए थे. इनमें दरार आ गई थी. इन्हें जैकेट पहनाकर ट्रीटमेंट किया गया. ये नदी के मुहाने पर वाले पिलर थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बता दें कि 2021 में इस एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया गया था. बाद के सालों में कई बार के एक्सटेंशन के बाद 2026 में बनकर यह एक्सप्रेसवे तैयार हुआ.
12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
बता दें कि आर्थिक विकास का नया मार्ग माने जा रहे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण में समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी संरक्षण पर विशेष ध्यान रखते हुए एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा बनाया गया है तथा करीब 34 हजार पेड़ों को कटने से बचाने के साथ ही 1.95 लाख पेड़ भी लगाए गए हैं.
213 किलोमीटर का है दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, छह लेन वाले 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का अंतिम 20 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग तथा उत्तराखंड के राजाजी बाघ अभयारण्य व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्र में आता है और इस हिस्से में बनाए गए वन्यजीव गलियारे से जानवरों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी.
इस एक्सप्रेसवे पर 370 मीटर की लंबी टनल
इस गलियारे में आठ पशु मार्ग, हाथियों के लिए दो अंडरपास और डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ‘साउंड बैरियर’ और ‘लाइट बैरियर’ जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि शोर और प्रकाश का उन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े. आधिकारिक जानकारी के अनुसार परियोजना के निर्माण के दौरान प्रारंभ में 45 हजार पेड़ों की कटाई का अनुमान था, लेकिन वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर उपयोग से केवल 11,160 पेड़ों को ही काटना पड़ा, जबकि 33,840 पेड़ सुरक्षित बचाए गए.