टाटा ट्रस्ट्स का परोपकारी कार्यों पर खर्च 202526 में 72.5 फीसदी बढ़कर 1,556.31 करोड़ रुपए हो गया. यह नोएल टाटा के चेयरमैन के रूप में पहला पूरा वित्तीय वर्ष था. संस्थागत फंडिंग का सबसे बड़ा हिस्सा ग्रामीण उत्थान, शिक्षा और कैंसर देखभाल के लिए दिया गया. ट्रस्ट्स की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, यह कुल राशि 202425 के 902.32 करोड़ रुपए से अधिक है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संस्थागत अनुदान और प्रत्यक्ष परियोजना खर्च 1,353.32 करोड़ रुपए रहा, जबकि व्यक्तियों को दी गई सहायता कुल 202.99 करोड़ रुपए थी. संस्थागत परियोजनाओं में सबसे अधिक 457.62 करोड़ रुपए ग्रामीण उत्थान के लिए दिए गए. इसके बाद शिक्षा के लिए 270.26 करोड़ रुपए और कैंसर देखभाल के लिए 178.46 करोड़ रुपए आवंटित किए गए.

नोएल टाटा का संदेश

स्वास्थ्य सेवा के लिए 105.97 करोड़ रुपए, जल और स्वच्छता के लिए 59.04 करोड़ रुपए, और पोषण के लिए 57.64 करोड़ रुपए दिए गए. व्यक्तिगत अनुदानों में से 143.30 करोड़ रुपए चिकित्सा सहायता के लिए थे, जबकि शिक्षा से जुड़ी सहायता 59.38 करोड़ रुपए रही. रिपोर्ट के साथ अपने संदेश में, नोएल टाटा ने कहा कि ट्रस्ट्स अब ऐसे संस्थानों और मॉडलों को बनाने पर अधिक ध्यान देंगे, जो लंबे समय तक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में काम आ सकें. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परोपकार को केवल खर्च की गई राशि या लाभान्वित लोगों की संख्या से नहीं, बल्कि इसके स्थायी और मापने योग्य परिणामों से आंका जाना चाहिए. ट्रस्ट्स पूरे भारत में 4050 गैरलाभकारी जनरल अस्पतालों का एक नेटवर्क बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं. इसका मॉडल इस तरह तैयार किया गया है ताकि जो लोग महंगा इलाज नहीं करा सकते, उन्हें भी अच्छी गुणवत्ता वाला इलाज मिल सके.

ट्रस्ट में भी हुए कई बदलाव

इस वर्ष ट्रस्ट्स की मुख्य यूनिट्स के बोर्ड में भी बदलाव हुए हैं. मेहली मिस्त्री 28 अक्टूबर, 2025 को सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी नहीं रहे. 12 नवंबर, 2025 को नेविल टाटा और भास्कर भट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल हुए, और उसी समय वेणु श्रीनिवासन को फिर से नियुक्त किया गया. प्रमित झावेरी का कार्यकाल 11 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गया. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है. ये ट्रस्ट अपने परोपकारी कार्यों के लिए काफी हद तक डिविडेंड पर निर्भर रहते हैं. 202425 के लिए, टाटा संस ने 2,622.91 करोड़ रुपए का डिविडेंड देने की सिफारिश की, जिसमें से लगभग 1,731 करोड़ रुपए ट्रस्ट्स को मिलने थे.