जब हम नई कार खरीदते हैं, तो कंपनी की तरफ से हमें एक वारंटी कार्ड मिलता है. बहुत से लोग इसे संभालकर तो रख लेते हैं, लेकिन इसकी शर्तें पढ़ते नहीं हैं. बाद में जब कार में कोई खराबी आती है, तब पता चलता है कि कौन सी चीज कंपनी ठीक करेगी और किसका खर्च खुद उठाना पड़ेगा.

आसान भाषा में समझें तो वारंटी कंपनी का एक वादा होता है. अगर तय समय के अंदर कार के किसी हिस्से में कंपनी की वजह से खराबी आती है, तो उसे ठीक करने या बदलने का खर्च कंपनी उठा सकती है.अलगअलग कंपनियों की वारंटी अलग हो सकती है. इसलिए कार खरीदने के बाद अपनी गाड़ी की वारंटी कितने साल या कितने किलोमीटर की है, यह जरूर जान लें.
वारंटी में कौनकौन सी चीजें आ सकती हैं?
कार की में आमतौर पर इंजन और गियर बदलने वाली मशीन जैसे बड़े हिस्से शामिल होते हैं. अगर इनमें कंपनी की तरफ से कोई खराबी आती है, तो कंपनी उसे बिना पैसे लिए ठीक कर सकती है.कार के बिजली से चलने वाले कई हिस्से भी वारंटी में आ सकते हैं. इनमें तार, सेंसर, संगीत सिस्टम और दूसरी बिजली से जुड़ी चीजें शामिल हो सकती हैं. इसके अलावा कुछ कंपनियां एसी, स्टीयरिंग और गाड़ी को संभालने वाले हिस्सों पर भी वारंटी देती हैं.
कार के रंग और जंग से बचाने के लिए भी अलग वारंटी मिल सकती है. कुछ कंपनियां टायर और बैटरी पर भी अपनी अलग शर्तों के साथ वारंटी देती हैं.अगर कोई हिस्सा बारबार खराब हो रहा है और वह वारंटी में शामिल है, तो कंपनी की जांच के बाद उसे ठीक या बदला जा सकता है.लेकिन इसके लिए एक जरूरी शर्त है. आपको कंपनी के बताए समय पर कार की सर्विस करवानी होगी और उसकी जरूरी शर्तों का पालन करना होगा.
किन चीजों का खर्च आपको खुद उठाना पड़ सकता है?
कार के कुछ हिस्से इस्तेमाल के साथ धीरेधीरे घिसते हैं. ऐसे हिस्सों को आमतौर पर वारंटी में शामिल नहीं किया जाता. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसमें ब्रेक पैड, क्लच प्लेट, वाइपर और कुछ बल्ब जैसी चीजें आ सकती हैं.अगर कार का हो जाता है और उससे नुकसान होता है, तो उसका खर्च आमतौर पर वारंटी से नहीं मिलता. ऐसे नुकसान के लिए कार का बीमा काम आता है.
इसी तरह अगर आपने कंपनी की अनुमति के बिना कार में कोई बदलाव किया है और उससे गाड़ी में खराबी आती है, तो कंपनी वारंटी देने से मना कर सकती है.उदाहरण के लिए, अपनी तरफ से अलग साइलेंसर या दूसरे गैरकंपनी हिस्से लगवाने के बाद कोई समस्या आती है, तो उसे वारंटी से बाहर रखा जा सकता है.समय पर कार की सर्विस न करवाने, गलत ईंधन डालने या कार का गलत तरीके से इस्तेमाल करने से हुई खराबी भी वारंटी में शामिल नहीं हो सकती.बाढ़, आग या दूसरी प्राकृतिक घटनाओं से कार को हुए नुकसान के लिए भी आमतौर पर वारंटी नहीं, बल्कि बीमा की जरूरत पड़ती है.
कार खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
नई कार खरीदने के बाद वारंटी कार्ड को सिर्फ संभालकर न रखें, बल्कि उसकी शर्तें भी पढ़ें. यह देखें कि वारंटी कितने साल या कितने किलोमीटर तक है और इसमें कौनकौन से हिस्से शामिल हैं.अगर कोई बात समझ नहीं आ रही है, तो डीलर या कंपनी से पूछ लें. सही जानकारी होने पर बाद में अचानक आने वाले खर्च से बचने में मदद मिल सकती है.
सबसे जरूरी बात यह है कि वारंटी को मुफ्त मरम्मत का खुला वादा न समझें. कंपनी की वारंटी कुछ तय नियमों के साथ आती है. इन नियमों को समझकर चलेंगे, तो जरूरत पड़ने पर इसका सही फायदा उठा पाएंगे.



