
Bureau of Energy Efficiency (BEE) के डायरेक्टर जनरल Krushna Chandra Panigrahy के मुताबिक, भारत में इंडक्शन बेस्ड कुकिंग के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग में बड़ा इजाफा हो सकता है. अनुमान है कि यह अतिरिक्त मांग 13 से 27 गीगावॉट (GW) तक हो सकती है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग कितनी तेजी से गैस से हटकर इंडक्शन कुकिंग को अपनाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार इस बदलाव को लेकर लगातार विश्लेषण कर रही है और पहले से तैयारी में जुटी है.
कब बढ़ती है सबसे ज्यादा खपत?
इंडक्शन स्टोव पर खाना बनाने का पैटर्न अलग होता है, जिसमें सुबह और शाम के समय बिजली की खपत सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. अलग-अलग राज्यों और इलाकों में मौसम, खानपान और आर्थिक स्थिति के हिसाब से इसका असर भी अलग-अलग देखने को मिलेगा. यानी जहां ठंडे इलाकों में ज्यादा समय तक खाना बनता है, वहां बिजली की मांग और ज्यादा हो सकती है.
क्यों बढ़ रही है इंडक्शन स्टोव की बिक्री?
पिछले कुछ समय में इंडक्शन स्टोव और माइक्रोवेव की बिक्री में तेजी आई है. इसकी एक बड़ी वजह वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कुकिंग गैस की सप्लाई को लेकर चिंता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसे ही सरकार ने गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर संकेत दिए, इंडक्शन स्टोव की बिक्री करीब 50% तक बढ़ गई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे साफ है कि लोग अब बिजली आधारित कुकिंग की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं.
पावर प्लांट्स ने क्यों टाला मेंटेनेंस?
ऊर्जा की बढ़ती जरूरत को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. Piyush Singh (पावर मंत्रालय) के अनुसार, करीब 10 गीगावॉट क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट्स ने अपनी तय मेंटेनेंस को तीन महीने के लिए टाल दिया है. आमतौर पर इस समय प्लांट्स में मरम्मत का काम होता है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसे आगे बढ़ा दिया गया है ताकि बिजली की सप्लाई बनी रहे.
गैस आधारित बिजली का कितना है योगदान?
भारत में गैस आधारित पावर प्लांट्स का योगदान कुल बिजली उत्पादन में सिर्फ 1.4% है. यही वजह है कि वेस्ट एशिया में तनाव के बावजूद देश में बिजली की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है. सरकार का कहना है कि फिलहाल बिजली की सप्लाई स्थिर बनी हुई है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है.
आने वाले महीनों में बढ़ेगी बिजली क्षमता
सरकार ने अगले तीन महीनों में 22 गीगावॉट से ज्यादा नई बिजली क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है. इसमें थर्मल, सोलर, विंड, हाइड्रो और बैटरी स्टोरेज जैसे कई स्रोत शामिल हैं. खास तौर पर सोलर एनर्जी (10 GW) और विंड एनर्जी (2.5 GW) पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है. इसके अलावा हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स और पंप स्टोरेज भी शामिल हैं, जिससे बिजली की उपलब्धता और मजबूत होगी.
क्या भविष्य में और बढ़ेगी बिजली की जरूरत?
इंडक्शन कुकिंग के बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले समय में बिजली की मांग लगातार बढ़ेगी. अगर लोग बड़े पैमाने पर गैस छोड़कर इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाते हैं, तो पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, सरकार पहले से तैयारी कर रही है, जिससे भविष्य में किसी तरह की बिजली कमी की समस्या न हो.






